खेतीबाड़ी करने वाले गुरप्रीत का अपने ही पड़ोस में रहने वाले बलविंद्र की पत्नी के साथ मेलजोल था। बलविंद्र भी खेतीबाड़ी का कार्य करता है। उसे एक लड़का व एक लड़की है। जबकि गुरप्रीत एक लड़के का पिता था। गुरप्रीत व बलविंद्र की पत्नी के बीच मेलजोल का सिलसिला करीब 3 वर्षों से चल रहा था। जिसको लेकर बलविंद्र के घर में अक्सर कलह होती रहती थी।
बताया गया है कि इस मामले में बलविंद्र व गुरप्रीत के मध्य 3-4 बार पंचायत भी हो चुकी थी लेकिन गुरप्रीत अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था। इस कारण बलविंद्र भी घर पर नजर रखने लग गया। रविवार मध्य रात्रि गुरप्रीत जैसे ही बलविंद्र के घर उसकी पत्नी से मिलने आया उसने तेजधार गंड़ासे से गुरप्रीत पर वार किया और उसके दोनों पैर काट दिए। इसके बाद गला दबाकर उसे मौत की नींद सुला दिया।
सरपंच को फोन कर कहा- मैंने गुरप्रीत को मार दिया
घटना को अंजाम देने के बाद बलविंद्र फरार नहीं हुआ, बल्कि उसने रात करीब पौने दो बजे स्वयं ही सरपंच को फोन पर इसकी सूचना दी और कहा कि उसने गुरप्रीत को मौत के घाट उतार दिया है। इसके बाद सरपंच की सूचना पर थाना प्रभारी ईश्वर सिंह मौके पर पहुंचे। आरोपी ने इस अपराध के लिए कोई पछतावा नहीं किया।
उसने अपना अपराध कुबूल करते हुए कहा कि उसने मजबूर होकर इस वारदात को अंजाम दिया है। गुरप्रीत पिछले काफी समय से उसके घर में कलह का कारण बना हुआ था। जब पानी सिर से ऊपर निकल गया तो उसे मजबूरन ये कदम उठाना पड़ा।