कई वर्ष पहले गांव मस्तापुर का एक व्यक्ति फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए सेना में भर्ती हो गया। सेना की नौकरी पूरी करने के बाद वह करीब 10 वर्ष पहले रिटायर्ड भी हो गया। लेकिन किसी भी अधिकारी ने उसके द्वारा सेना में जमा कराए गए कागजात की जांच तक करना जरूरी नहीं समझा।
उसी के गांव की रहने वाली एक महिला ने अदालत में याचिका दायर कर यह खुलासा किया है। अदालत ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश भी जारी कर दिया है। थाना रोहड़ाई पुलिस अदालत के आदेश पर केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
गांव मस्तापुर की रहने वाली शकुंतला देवी ने कुछ माह पहले कोसली अदालत में एक याचिका दायर कर बताया था कि उसके गांव का जगदीश सेना में नौकरी करता था। सेना में वह जरनल कोटे से भर्ती हुआ था। जबकि वह अहीर जाति से संबंध रखता है और उसने ब्राह्मण जाति का प्रमाण पत्र भर्ती के लिए जमा कराया था। सेना में नौकरी पूरी करने के बाद 1 सितंबर 2005 को जगदीश रिटायर्ड भी हो चुका है। रिटायर्ड के बाद से जगदीश सेना की पेंशन भी ले रहा है।
कागजातों में मिली कई खामियां
शिकायतकर्ता शकुंतला के अनुसार सेना के अधिकारियों ने कभी भी जगदीश द्वारा उपलब्ध कराए गए जरूरी कागजातों की जांच नहीं की। याचिका के आधार पर कोसली अदालत की न्यायाधीश संप्रीत कौर ने मामले की जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान जगदीश के कागजातों में कई प्रकार की खामियां पाई गई।
न्यायधीश संप्रीत कौर ने बुधवार को आरोपी जगदीश के खिलाफ रोहड़ाई पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश जारी किए। थाना प्रभारी दलीप सिंह ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में अदालत के आदेश पर जगदीश के खिलाफ धारा 415, 419, 468, 471 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।