जाली कागजात दिखाकर सेना और सीआरपीएफ में नौकरी पाने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट सौंप दी गई है, जल्द कार्रवाई होगी। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की पड़ताल में यह धोखाधड़ी सामने आ गई। बोर्ड ने अपनी जांच रिपोर्ट इन संस्थानों को भेज दी है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस साल सिर्फ जनवरी से लेकर मार्च तक नौ जाली सर्टिफिकेट का पर्दाफाश किया है। जिनमें सबसे ज्यादा पांच उम्मीदवार सेना से संबंधित हैं।
इन सभी ने जाली दस्तावेज लगा कर सेना में नौकरी हासिल की। फिरोजपुर स्थित सेना भर्ती दफ्तर की ओर से इनके सर्टिफिकेट जांच के लिए पंजाब बोर्ड को भेजे गए। बोर्ड की पड़ताल में जालसाजी का खुलासा हुआ। इनमें बलजिंदर सिंह ने 2009 में बोर्ड से मैट्रिक करने का जाली सर्टिफिकेट लगाया। इसी तरह भगवंत सिंह ने 2009 में बोर्ड से मैट्रिक, हरजीत सिंह ने 2012 में मैट्रिक, राजदीप सिंह ने 2010 में मैट्रिक, हरजीत सिंह ने 2011 में बोर्ड से मैट्रिक का जाली सर्टिफिकेट लगाया।
सीआरपीएफ के साथ भी धोखाधड़ी की गई। जगजीवन सिंह ने 2009 में बोर्ड से मैट्रिक का सर्टिफिकेट सीआरपीएफ राजस्थान में नौकरी के लिए लगाया। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह सर्टिफिकेट पंजाब बोर्ड ने जारी ही नहीं किया। हरजिंदर कौर ने 1994 में बोर्ड से मैट्रिक पास का सर्टिफिकेट लगा कर डीसी दफ्तर तरनतारन में नौकरी हासिल कर ली। पुरषोत्तम ने 2002 में बोर्ड से दसवीं का सर्टिफिकेट लगा कर पनबस के नंगल डिपो में नौकरी प्राप्त की। वहीं, लखविंदर सिंह ने 2009 में बोर्ड से बारहवीं का जाली दस्तावेज लगा कर पंजाब रोडवेज में नौकरी हासिल की।
आईटीबीपी के जाली नियुक्ति पत्र दे रहे जालसाज
अब एक नया खुलासा हुआ है कि जालसाज पैसे लेकर भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जाली नियुक्ति पत्र दे रहे हैं, भोले-भाले नौजवानों को मूर्ख बना रहे हैं। जिसके बाद आईटीबीपी को बाकायदा चेतावनी जारी करनी पड़ी। जिसमें कहा गया है कि कुछ बेईमान तत्व आईटीबीपी के विभिन्न पद, खासकर कांस्टेबल के जाली नियुक्ति पत्र जारी कर रहे हैं। आईटीबीपी में चयन के लिए साधारण आवेदन और फीस के अलावा कोई राशि वसूल नहीं की जाती। इसलिए जनता ऐसे बेईमान लोगों के झांसे में न आएं। आईटीबीपी में नियुक्ति के लिए किसी को पैसे न दें। किसी के साथ धोखाधड़ी होती है तो आईटीबीपी की जिम्मेदारी नहीं होगी।