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कॉल सेंटरों की नौकरी छोड़ने वाले बेच रहे लोगों का डाटा

Tue, 23 Feb 2016 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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ऑनलाइन ठगी के मामलों में जांच करने पर पता चला है कि जो डाटा कंपनियों से चोरी होती हैं, इसमें वहां काम कर रहे कर्मचारी या पूर्व कर्मचारी संलिप्त होते हैं। साइबर सेल ने कंपनियों को हिदायत दी है कि कर्मचारियों को नौकरी पर रखने से पहले उनके बारे में अच्छी तरह से जांच कर लें।
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काल सेंटर संचालकों को हर कर्मचारी का पुलिस रिकार्ड जरूर चेक करना चाहिए। सेल के पास एक कंपनी से डाटा चोरी होने का एक मामला आया है। कंपनी ने पुलिस में लिखित शिकायत नहीं दी है, लेकिन पुलिस से संपर्क कर कर्मचारी द्वारा डाटा चोरी होने की बात कही है।

साइबर सेल का कहना है कि पहली बार उसके पास इस तरह का मामला आया है। अगर पीड़ित लिखित शिकायत देगा तो केस दर्ज कर जांच की जाएगी।

पुराने कर्मचारी वारदात को देते हैं अंजाम
साइबर सेल की डीएसपी रश्मि यादव का कहना है कि जो भी कॉल सेंटर चला रहे हैं, वह किसी कर्मचारी को रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं। क्योंकि कर्मचारी जब नौकरी छोड़ता है तो अपने साथ डाटा और अन्य जानकारियां चुराकर ले जा सकता है, जिसका वह बाद में दुरुपयोग करता है।
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अन्य मामलों में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि काल सेंटरों या किसी कंपनी के पुराने कर्मचारी डाटा चुराकर वारदातों को अंजाम देते हैं। पुलिस भी शहर में हर कंपनियों से अपील करती है कि कर्मचारियों को रखने से पहले उनका पुलिस सत्यापन जरूर करवाएं।

बैंकों से आते हैं डाटा चोरी के ज्यादा मामले
पुलिस का कहना है कि  बैंकों के पास खाता धारकों के फोन नंबर, पता और कस्टमर से जुड़ा डाटा होता है। वही से कस्टमर के बारे में डाटा निकलता है। कॉल सेंटर चलाने वाले वहीं से डाटा या तो पैसा देकर हासिल करते हैं या फिर उन्हीं का कोई कर्मचारी चुराता है। इसलिए बैंकों को अपने कर्मचारियों को रखने से पहले पुलिस  वेरिफिकेशन करवानी चाहिए।

साइबर सेल कर रहा 142 ऑनलाइन ठगी मामलों की जांच
डीएसपी ने बताया कि इस समय साइबर सेल ऑनलाइन ठगी के 142 मामलों की जांच कर रहा है। इनमें सबसे ज्यादा एटीएम और क्रेडिट कार्ड कार्ड की डिटेल लेकर ऑनलाइन ठगी करने के मामले दर्ज हैं। सेल के पास 12 मामले मोबाइल पर धमकी देने के हैं। ऑनलाइन नौकरी, लॉटरी व सामान बेचने के नाम पर फ्रॉड के 12 मामले हैं। लोन दिलवाने के नाम पर धोखाधड़ी के नौ केसों की जांच चल रही है। वही सेल ने 2015 में 32 के स सुलझाए भी हैं।
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