फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वर्ष 2015 में हाईप्रोफाइल मामले में कोर्ट के चर्चित फैसले

Thu, 24 Dec 2015 08:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2015 जिला अदालत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। 11 साल पुराने चर्चित बुड़ैल जेल ब्रेक मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। वहीं, नवंबर 2013 में पलसौरा में 11 वर्षीय बच्ची की अपहरण के बाद निर्मम हत्या के मामले में कोर्ट ने दोषियों को सजा सुनाई। इसके अलावा छात्रा से छेड़छाड़ और वसूली में डांस टीचर को महिला अपराध से जुड़ी विशेष कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई। इसके अलावा भी कई चर्चित मामलों में इस साल कोर्ट से फैसले सुनाए गए। पेश है इन पर एक विशेष रिपोर्ट:
विज्ञापन


11 अगस्त: बुड़ैल जेल ब्रेक : 11 अगस्त 2015 को सीजेएम कोर्ट ने 11 साल पुराने चर्चित बुड़ैल जेल ब्रेक में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले में परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह हवारा को दोषी करार देते हुए उनकी सजा को अंडर गॉन (ट्रायल के दौरान सजा पूरी करना) कर दिया। वहीं, केस में 14 अन्य आरोपियों को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

इसके अलावा जगतार सिंह तारा, देवी सिंह और गुरविंदर सिंह गोल्डी को भगौड़ा घोषित कर दिया। मामले में कुल 21 आरोपी थे। बरी होने वालों में जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा, डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट दलबीर सिंह संधू, असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट वेद मित्तल गिल और पीएस राणा, वार्डर इंद्र सिंह, हवलदार निशान सिंह सहित नारायण सिंह चौरा, नंद सिंह, शेर सिंह, लखविंदर सिंह, गुरदीप सिंह, सुबेग सिंह, गुरनाम सिंह और एसपी सिंह शामिल हैं।
विज्ञापन


आरोपियों में से छह पुलिसकर्मी, दो सीआरपीएफ के कर्मचारी, एक पाकिस्तानी जासूस आबिद मोहम्मद भी शामिल थे। आबिद जासूसी मामले में पहले ही सजा पूरी कर चुका था। इसके बाद उसे वतन वापस भेज दिया गया। कुल 21 आरोपियों में एक महिला बलजीत कौर भी आरोपी थी। हालांकि उसकी ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।

पलसौरा में बच्ची की अपहरण के बाद निर्मम हत्या के चर्चित मामले

28 अगस्त: बेबी पलसौरा मर्डर: नवंबर 2013 में पलसौरा में 11 वर्षीय बच्ची की अपहरण के बाद निर्मम हत्या के चर्चित मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की कोर्ट ने दो दोषियों भगत उर्फ मंगा, रोपड़ के राजकुमार उर्फ राजा को आजीवन कैद की सजा सुनाई थी। वहीं, सुनीता उर्फ बिल्ली को उम्रकैद की सजा दी थी।

बेबी पलसौरा मर्डर के नाम से चर्चित केस में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘केस में पाया गया कि सुनीता, राजू और मंगा ही असली दोषी हैं। तीनों का अपराध रहम के काबिल नहीं हैं।

इन्हें कठोर और समाज के लिए नजीर बनाने वाली सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने एक मासूम बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की है। सुनीता ने बच्ची को अपनी कैद में रखा और बाद में अन्य दोषियों के हवाले कर दिया।’ वहीं इस मामले में चौथा आरोपी नाबालिग है। उसके खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट में केस चल रहा है। हालांकि कोर्ट उसे भगोड़ा करार दे चुकी है।

4 सितंबर: छात्रा में डांस टीचर दोषी: शहर के एक चर्चित कॉन्वेंट स्कूल की स्टूडेंट से छेड़छाड़ और ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय अंशु शुक्ला की कोर्ट ने पंचकूला निवासी डांस टीचर आकाश उर्फ एरिक को एक सितंबर को दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई।

यह मामला मार्च में उस समय चर्चा में आया था जब पुलिस के चालान में देरी पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे सेक्टर-34 थाना पुलिस की गंभीर लापरवाही माना था। इस पर एसएसपी ने सेक्टर-34 थाने के एसएचओ कृपाल सिंह को लाइन हाजिर और जांच अधिकारी एएसआई परमजीत सिंह को सस्पेंड कर दिया था।
विज्ञापन

दुष्कर्मी बाप को 20 साल कैद, ड्रग क्वीन को कड़ी सजा

19 मई: ड्रग क्वीन को भेजा सलाखों के पीछे
सिटी की ड्रग क्वीन के नाम से विख्यात बाला को इस साल उसके खिलाफ दर्ज एनडीपीएस के मामले में कोर्ट ने दोषी करार देते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया। शहर में कई वर्षों से ड्रग्स का कारोबार चला रही सेक्टर-38ए निवासी बाला के खिलाफ यूटी पुलिस में करीब 3 दर्जन केस दर्ज हैं।

इनमें चोरी, ड्रग तस्करी, सेंधमारी जैसे मामले शामिल हैं। बाला के खिलाफ 5 नवंबर 1992 को पहला केस सेंधमारी का दर्ज किया गया था। इसके बाद अगले ही दिन उसके खिलाफ दूसरा केस भी दर्ज किया गया था। 23 साल में उस पर करीब तीन दर्जन केस दर्ज हो चुके हैं।

कोर्ट ने बाला को सजा सुनाते हुए कहा कि नशा समाज के लिए बहुत नुकसानदेह है। दोषी के पिछले रिकार्ड को अनदेखा नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा सुनाई जानी चाहिए।

24 मार्च : दुष्कर्मी बाप को 20 साल कैद
कई वर्षों तक बेटी का यौन उत्पीड़न और रेप मामले में जिला अदालत ने एक दुष्कर्मी पिता को 20 साल की सजा सुनाई। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महिलाओं के प्रति समाज में अपराध बढ़ रहा है। पहले उनके घर से बाहर निकलने पर परिजन असुरक्षित महसूस करते थे, लेकिन इस मामले में पीड़िता पर घर में ही अत्याचार हुआ।

ऐसे में दोषी सख्त से सख्त सजा का हकदार है। उसके प्रति उदारता नहीं बरती जा सकती। उसे ऐसी सजा सुनाई जानी चाहिए जो समाज के लिए नजीर बने। मामले के अनुसार मलोया निवासी 21 वर्षीय पीड़िता ने जनवरी 2014 में सेक्टर-39 थाना पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि उसका पिता कई साल से उसका यौन शोषण कर रहा है। जब वह छह साल की थी तब उसके पिता ने उससे पहली बार आपत्तिजनक हरकतें की थी।

उसने शोर मचाया था तो पड़ोस में रहने वाली महिलाएं वहां आ गईं थीं और उसकी जमकर पिटाई की थी। इसके बावजूद वह नहीं सुधरा और उसे अक्सर परेशान करता रहा। इसके बाद उसने कई बार उससे दुराचार किया।

सामाजिक शर्म के कारण वह चुप रही और पिता की हरकतें सहन करती रही। जब वह कॉलेज जाने लगी तब भी दोषी नापाक हरकतों से बाज नहीं आया। इसके बाद उसने अपने कॉलेज की एक टीचर को इस बारे में बताया। कॉलेज टीचर की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर पिता को गिरफ्तार किया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें