वर्ष 2015 जिला अदालत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। 11 साल पुराने चर्चित बुड़ैल जेल ब्रेक मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। वहीं, नवंबर 2013 में पलसौरा में 11 वर्षीय बच्ची की अपहरण के बाद निर्मम हत्या के मामले में कोर्ट ने दोषियों को सजा सुनाई। इसके अलावा छात्रा से छेड़छाड़ और वसूली में डांस टीचर को महिला अपराध से जुड़ी विशेष कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई। इसके अलावा भी कई चर्चित मामलों में इस साल कोर्ट से फैसले सुनाए गए। पेश है इन पर एक विशेष रिपोर्ट:
11 अगस्त: बुड़ैल जेल ब्रेक : 11 अगस्त 2015 को सीजेएम कोर्ट ने 11 साल पुराने चर्चित बुड़ैल जेल ब्रेक में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले में परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह हवारा को दोषी करार देते हुए उनकी सजा को अंडर गॉन (ट्रायल के दौरान सजा पूरी करना) कर दिया। वहीं, केस में 14 अन्य आरोपियों को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
इसके अलावा जगतार सिंह तारा, देवी सिंह और गुरविंदर सिंह गोल्डी को भगौड़ा घोषित कर दिया। मामले में कुल 21 आरोपी थे। बरी होने वालों में जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा, डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट दलबीर सिंह संधू, असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट वेद मित्तल गिल और पीएस राणा, वार्डर इंद्र सिंह, हवलदार निशान सिंह सहित नारायण सिंह चौरा, नंद सिंह, शेर सिंह, लखविंदर सिंह, गुरदीप सिंह, सुबेग सिंह, गुरनाम सिंह और एसपी सिंह शामिल हैं।
आरोपियों में से छह पुलिसकर्मी, दो सीआरपीएफ के कर्मचारी, एक पाकिस्तानी जासूस आबिद मोहम्मद भी शामिल थे। आबिद जासूसी मामले में पहले ही सजा पूरी कर चुका था। इसके बाद उसे वतन वापस भेज दिया गया। कुल 21 आरोपियों में एक महिला बलजीत कौर भी आरोपी थी। हालांकि उसकी ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।