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इतनी रैगिंग हुई कि... छात्र की आपबीती सुन रो देंगे

Sun, 08 Mar 2015 10:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ /लखनऊ
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चंडीगढ़ के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में रैगिंग से परेशान बीटेक का छात्र अपना मानसिक संतुलन खो बैठा। वह वहां से भाग निकला और सात माह तक इधर-उधर भटकता रहा। इटौंजा क्षेत्र में उसे लोगों ने घूमते देखा तो थाने पर पहुंचा दिया।
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पुलिस ने उससे बात की तो उसने आपबीती सुनाने के साथ ही पिता का मोबाइल नंबर भी बता दिया। पुलिस ने परिवार से संपर्क किया तो बेटे के मिलने की खबर सुनकर वह खुशी से झूम उठे। इसके बाद वह शनिवार को लखनऊ पहुंचे और अपने बेटे को साथ ले गये।

चंडीगढ़ के कॉलेज में इंजीनियरिंग का स्टूडेंट है अरविंद

एसओ इटौंजा सुभाष सिंह ने बताया कि झारखंड के हजारीबाग निवासी अनूप चंद्र मेहता झारखंड पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं। उनका 22 वर्षीय बेटा अरविंद कुमार मेहता चंडीगढ़ के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक का छात्र है।

इस कॉलेज में सीनियर छात्रों की रैगिंग से वह परेशान हो गया। लगभग सात महीने पहले अरविंद कुमार मेहता अपना दिमागी संतुलन खो बैठा। परेशान होकर वह इधर उधर भटकता रहा। उसे अपने घर का रास्ता याद नहीं आ रहा था।

वह अपने घर की तलाश करते हुये घूम रहा था। कपड़े फट चुके थे और मटमैले हो चुके थे। लोग भिखारी समझकर जो कुछ भी उसे दे देते थे वह खुशी से खा लेता था और अपने घर की तलाश में फिर चल पड़ता था। भटकते-भटकते वह शुक्रवार की रात इटौंजा क्षेत्र में पहुंच गया।
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भटकते देखकर ग्रामीणों ने पुलिस को खबर की

युवक को भटकते देखकर कुछ ग्रामीणों ने उसे देखा और पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद युवक को इटौंजा थाने पर पहुंचा दिया। वहां पर जब प्यार से अरविंद से बात की गई और उसे घर पहुंचाने का भरोसा दिलाया गया तो वह खुश हो गया। उसने अपने पिता का नाम और मोबाइल फोन तक बता दिया।

जब उस नंबर पर बात की गई तो पता चला कि वह परिवार वाले उसके मिलने की सारी उम्मीदें ही खो चुके थे। वह लोग उसे मरा समझ बैठे थे और लगभग हर संभावित जगह पर उसकी तलाश कर चुके थे। इसके बाद पिता अनूप चंद्र मेहता लखनऊ पहुंचे। शनिवार को पुलिस ने अरविंद को उसके बिछड़े परिवारवालों से मिलवा दिया।
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