घटना के बाद जब बिजली विभाग के ठेकेदार विशाल शर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि अमरनाथ उनके पास काफी समय से काम कर रहा था। सेक्टर-47सी में 11 हजार वोल्ट खंभे की तार टूटी हुई थी, जिसे सही करने के लिए अमरनाथ व अन्य लोग पहुंचे थे। यह सारी कार्रवाई जेई की देखरेख में हो रहा था। विशाल के अनुसार कि गुरुवार सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बिजली कट का टाइम था, जिसे देखते हुए सुबह 10 बजे से ही काम शुरू कर दिया था। लेकिन यह सब कैसे हो गया कुछ पता नहीं चला।
जेई बोला- नहीं कराया था वर्क परमिट कैंसिल
जेई राजकुमार ने बताया कि अमरनाथ टूटी हुई तारों को ठीक कर रहा था। इस दौरान करंट लगने के बाद वह नीचे गिर गया, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया कि काम के दौरान वर्क परमिट कैसिंल नहीं कराया था, बावजूद इसके तारों में अचानक करंट आ गया।
नहीं है कोई सहारा
मृतक की पत्नी जीरा ने बताया कि उनकी 12 और 14 साल की दो बेटियां हैं। घर में कमाने वाला सिर्फ उनका पति ही था। उन्हीं की कमाई से घर का खर्चा और बच्चों की पढ़ाई हो रही थी। अब उनका कोई सहारा नहीं है। उन्हें चिंता सता रही है कि उनके बच्चों की अब परवरिश कैसे होगी।
हादसा इतना जबरदस्त था कि करंट का झटका लगते ही वह नीचे गिर गया। अब सवाल यह उठता है कि जब सुबह 10 से 4 बजे तक अगर बिजली कट के निर्देश थे तो अमरनाथ 4 बजे के बाद भी तारों को क्यों जोड़ता रहा। क्या उसे इस बात की जानकारी थी कि बिजली कट का समय 4 बजे तक ही है। आखिरकार उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है जिसकी गलती कि वजह से अमरनाथ की जान गई।
अभी तक मौत के कारणों का सही पता नहीं चल सका है। हो सकता है बैलेंस न बना पाया हो या फिर करंट से मौत हुई हो। यह जांच का विषय है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही सही पता चल सकेगा। इस मामले में जिसकी भी लापरवाही होगी, उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी। -गोपाल दत्त जोशी, महासचिव, यूटी पावर मैन यूनियन
सुरक्षा के मानक
यदि कोई कर्मचारी बिजली के तारों को ठीक कर रहा है तो उसके पास टोपी, ग्लब्स, सेफ्टी बेल्ट और ड्रेस के अलावा कई अन्य चीजें जरूरी होती हैं। वहीं, सेक्टर-47 के आरडब्ल्यूएस के प्रधान सुखविंदर सिंह का कहना है कि हादसे के समय बिजली कर्मी के पास सेफ्टी बेल्ट, ग्लब्स और अन्य चीजें नहीं थीं।