चंडीगढ़ पुलिस को शक है कि पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में अंधाधुंध गोलीबारी कर भागे तीनों आरोपियों ने ही गत 29 मार्च को पंजाब पुलिस पर गोलियां बरसा कर गैंगेस्टर पलविंदर सिंह पिंडा को छुड़ाया है।
डीएसपी सतीश कुमार का कहना है कि 29 मार्च को चार हथियार बंद बदमाश नाभा सिविल अस्पताल के पास पंजाब पुलिस पार्टी पर फायरिंग कर पलविंदर सिंह पिंडा को छुड़ा लिया था। पुलिस मान रही है कि पीयू गोलीकांड में फरार तीनों आरोपी रिंदा, रणजीत सिंह और गोपी का हाथ उस वारदात में भी हो सकता है। इसकी अभी जांच की जा रही है।
दोनों जगह 9 एमएम पिस्टल से गोलियां चलीं
डीएसपी सेंट्रल का कहना है कि दोनों जगह गोलियों के जोखोल और गोलियां मिली हैं वे 9 एमएम की पिस्टल से चली हैं। इससे लगता है कि ये गोलियां एक ही पिस्टल से चली हैं व चलाने वाले भी एक ही लोग हो सकते हैं।
चली बुलेट भेजी जांच के लिए
यूटी पुलिस ने पीयू में मिली गोलियां और खोल सीएफएसएल जांच के लिए भेजी हैं। डीएसपी का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि दोनों जगह फायरिंग एक ही पिस्टल से हुई थी या नहीं। पुलिस कह रही है कि दोनों जगह जो चले हुए बुलेट मिले हैं वे 9 एमएम पिस्टल के ही है।
यह था मामला
आठ अप्रैल को पीयू में पूसू व सोई कार्यकर्ताओं के बीच एक फैशन शो के दौरान बहसबाजी हो गई थी। उसके बाद पूसू की तरफ पीयू स्टुडेंट सेंटर पर सोई कार्यकताओं पर आठ राउंड फायरिंग की गई थी। जिसमें पीयू छात्र संघ अध्यक्ष मनप्रीत औलख की जांघ में गोली लगी थी। पुलिस ने इस मामले में पूसू के रेशम सिंह गोदारा, नवलदीप, रणदीप सिंह, शुषम नोनिया, और रिंदा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में पुलिस ने रेशम गोदारा और नवलदीप को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि बाकि के तीनों आरोपी फरार है।