कांस्टेबल आनंद को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है। उसने पांच दिन पहले जीएमएसएच-16 में पत्नी डिंपल की गोली मार कर हत्या कर दी थी। डिंपल जीएमएसएच-16 की ही कर्मचारी थी।
आनंद ने खुद को भी गोली मार ली थी जिस कारण वह अस्पताल में भर्ती था। दोपहर 1:20 बजे डिसचार्ज होने के बाद पुलिस चुपके से उसे पिछले गेट से लेकर सेक्टर-17 थाने ले गई।
पुलिस को आशंका थी कि परिजन और गुस्साए लोग कांस्टेबल आनंद पर हमला कर सकते हैं। इसके साथ ही पुलिस ने बॉक्सर आनंद को सेक्टर-17 थाने में रखकर मुख्य गेट भी बंद कर दिया। पूछताछ के बाद ही अंदर जाने की मंजूरी दी जा रही थी।
परिजनों का आरोप, नरमी बरत रही पुलिस
परिजनों का आरोप है कि पुलिस आरोपी कांस्टेबल के साथ नरमी बरत रही है। डिंपल के पिता मामचंद का कहना है कि कांस्टेबल आनंद को उम्र कैद एवं फांसी की सजा होनी चाहिए। उनका कहना है कि आनंद ने उसकी प्यारी बच्ची उनसे छीन ली है।
डिंपल की बहनें अभी भी गहरे सदमे में हैं। परिजनों का कहना है कि पुलिस को आरोपी कांस्टेबल को लोगों के हवाले कर देना चाहिए। पुलिस के अनुसार सोमवार को आनंद की एक बार फिर से सर्जरी हुई है।
रिमांड की मांग करेगी पुलिस
पुलिस आरोपी आनंद को बुधवार को जिला अदालत में पेश करेगी। पुलिस आरोपी का रिमांड हासिल करेगी। पुलिस के अनुसार रिमांड के दौरान यह पता किया जाएगा कि आनंद ने किन कारणों से अपनी पत्नी की हत्या की है।
मालूम हो कि आनंद के खिलाफ हत्या और एक अन्य महिला कांसल निवासी सवित्री पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। महिला सवित्री अपने बेटे को अस्पताल में चेकअप के लिए लेकर आई थी।
आज होगी एसएसपी के साथ बैठक
डिंपल के परिजनों और अन्य लोगों की बुधवार को 12 बजे एसएसपी के साथ बैठक होगी। इस मौके पर परिजनों की ओर से कहा जाएगा कि डिंपल के बच्चों की पुलिस वेलफेयर बोर्ड से मदद की जाए।
इसके साथ ही उन पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए, जिन्होंने डिंपल की शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया था। मालूम हो कि एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल पहले ही डीएसपी जगबीर सिंह को इस मामले की जांच सौंप चुके हैं।
40 मिनट का खेल
कांस्टेबल आनंद के प्रति अस्पताल के कर्मचारियों में भारी रोष था। पुलिस को संभावना थी कि अस्पताल से छुट्टी के समय जब मुख्य प्रवेश द्वार से ले जाया जाएगा तो आनंद पर हमला हो सकता है। ऐसे में पुलिस ने एक चाल चली। यह बात फैलाई गई कि 2 बजे आनंद को गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन पुलिस आरोपी को 40 मिनट पहले ही निकाल कर ले गई।
अस्पताल के पिछली तरफ के रास्ता का इस्तेमाल नहीं किया जाता लेकिन उसे निकालने के लिए इसके गेट खोले गए। आनंद का मुंह भी कपड़े से ढंक दिया गया। वहीं प्रवेश द्वार पर लोगों के अलावा मीडियाकर्मी भी एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करते रहे। आनंद को गिरफ्तार करने के लिए थाना प्रभारी दिलशेर चंदेल खुद पहुंचे थे।
अस्पताल के एक कर्मचारी के अनुसार जब कोई आम व्यक्ति किसी हत्या के मामले में आरोपी होता है तो पुलिस खुलेआम गिरफ्तार करके अदालत लेकर जाती है। जब अपने ही कांस्टेबल की बारी आई तो उसे छिपा कर ले जा रहे हैं।