करनाल की 12 वर्षीय दुराचार पीड़िता के गर्भपात पर हाईकोर्ट ने फरमान सुनाते हुए सरकार को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। पीजीआई रोहतक के मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गर्भपात कराना लड़की के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
उधर, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पीजीआई चंडीगढ़ को पीड़िता की डिलीवरी कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इलाज और डिलीवरी का सारा खर्च हरियाणा सरकार वहन करेगी। पीड़िता के शिशु की परवरिश की जिम्मेदारी भी हरियाणा सरकार की ही होगी।
फरवरी महीने में दुराचार की एफआईआर दर्ज हुई थी। पीड़िता की डाक्टरी जांच में उसके गर्भवती होने की पुष्टि। उसकी मां ने गर्भपात कराने की गुहार लगाई।
करनाल के सीएमओ की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि पीड़िता बच्चे को जन्म दे सकती है, लेकिन पीजीआई रोहतक के मेडिकल बोर्ड के सदस्य डाक्टरों ने रिपोर्ट में कहा कि 28 सप्ताह का गर्भ है, ऐसे में गर्भपात पीड़िता के लिए खतरनाक साबित होगा।