चंडीगढ़ में सेक्टर-63 में जनरल सेल्फ फाइनेसिंग हाउसिंग स्कीम के तहत चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की ओर से बनाए गए फ्लैट्स की धांधली में जांच के बाद सीबीआई ने प्राइवेट कंपनी बीएल मेहता के खिलाफ भ्रष्टाचार की धारा के तहत केस दर्ज कर लिया है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई में जांच में पाया कि आरोपी कंपनी ने अपना काम समय से पूरा न करने के बाद आला अधिकारियों को पैसे का लाभ पहुंचाया। इसके अलावा उन्होंने फ्लैट्स निर्माण में तय सामान की जगह सस्ता सामान इस्तेमाल किया है। वहीं, 18 महीने की तय अवधि से ज्यादा समय लिया।
इसके बाद सीबीआई ने फर्म के खिलाफ केस दर्ज किया। इस मामले में हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के सीबीआई बयान दर्ज कर सकती है। सीबीआई टीम बयान दर्ज के बाद क्रॉस एग्जामिनेशन करवाया जाएगा। इसके आधार पर साबित हो सके कि बयान देने वाले सच बोल रहे है या झूठ?
इस केस में सीबीआई टीम ने छापामारी कर मकानों से संबंधित 2010 से लेकर अभी तक के दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया था। सीबीआई ने दस्तावेजों की पड़ताल में पाया था कि फ्लैटों को तैयार करने के लिए उपयोग होने वाला मेटीरियल तय समय पर नहीं पहुंचा, जिस कारण फ्लैट्स के निर्माण में देरी हुई।
इस दौरान सीबीआई की जांच में सामने आया कि फ्लैट्स निर्माण का काम रुकने पर अधिकारियों ने मीटिंग की थी। इस समय अफसरों ने कौन से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। इसी के साथ सीबीआई मामलें से संबंधित तमाम चीजों को दस्तावेज और फ्लैैट में लगे मेटीरियल की भी जांच करवाएगी।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने 2008 में जनरल सेल्फ फाइनेसिंग हाउसिंग स्कीम के तहत कालोनियों में रहने वाले लोगों अलग अलग कैटगरी के फ्लैट निकाले थे। इसमें तीन बैड रूम का लैट 39.57 लाख, दो बैडरूम का लैट 29.14 लाख रुपये ,एक बैड रूम का लैट 17.15 लाख रुपये और एक फ्लैट्स ईडब्लूएस की कीमत 5.66 लाख रुपये की थी।