कोरोना वायरस के खौफ और कर्फ्यू के कारण चंडीगढ़ में क्राइम का ग्राफ करीब 65 फीसदी गिर गया है। इसे पुलिस की मुस्तैदी कहें या अपराधियों में संक्रमण का खौफ। कारण जो भी हो, मगर अपराध कम होने से कोरोना की जंग में जुटी पुलिस को काफी मदद मिल रही है। फिलहाल शहर में औसतन हर महीने करीब 126 मामले दर्ज किए जाते रहे थे जो कर्फ्यू के दौरान घटकर 44 के आंकड़े पर पहुंच गए हैं।
जनवरी महीने में शहर के अलग-अलग थानों में घरों व दुकानों में चोरी के अलावा स्नैचिंग, लूटपाट, दंगा, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, दुष्कर्म, हत्या और वाहन चोरी जैसे वारदातों में पुलिस ने 135 मामले दर्ज किए थे। वहीं, फरवरी महीने में यह आंकड़ा बढ़कर 139 हो गया जबकि मार्च में कुल 103 मामलों में केस दर्ज किए गए लेकिन अब कर्फ्यू के दौरान पुलिस ने सिर्फ 44 मामलों में केस रजिस्टर्ड किया है जो अब तक किसी भी महीने में सबसे कम केस दर्ज हुए हैं।
आला अधिकारियों के अनुसार, क्राइम ग्राफ घटने की एक वजह यह भी है कि लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे और पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद है। कर्फ्यू में किसी भी वाहनों को चेक किए बगैर जाने नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते इन क्राइम आंकड़ों में पुलिस ने अंकुश लगा लिया गया है।
छेड़छाड़ और दुष्कर्म के मामले नियंत्रण में
कर्फ्यू के दौरान चोरी, स्नैचिंग, लूटपाट, दंगा, धोखाधड़ी, सड़क हादसों में कमी के साथ साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म कि वारदातें भी थम गई हैं। पिछले तीन महीनों में छेड़छाड़ के 12 केस दर्ज हुए हैं जबकि कर्फ्यू में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया है। वहीं, तीन महीनों में दुष्कर्म के 14 जबकि कर्फ्यू में सिर्फ एक मामला रजिस्टर्ड किया गया है।