तिहरे हत्याकांड के केस में फांसी की सजा का सामना कर रहे धर्मपाल की फांसी की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। हाईकोर्ट ने सुनवाई 21 अप्रैल के लिए स्थगित कर दी है। धर्मपाल के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था और उसे जिला अदालत ने सजा सुनाई थी। इसी मामले में वह जेल में बंद था और छुट्टी मिलने पर उसने दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों को मौत के घाट उतार दिया था।
इस मामले में सोनीपत जिला अदालत ने धर्मपाल को फांसी की सजा सुनाई थी। कत्ल केस में वह पिछले डेढ दशक से जेल में बंद था और सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा माफ करने की अपील खारिज होने के बाद उसने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी।
यहां से भी उसकी दया याचिका खारिज हो गई थी और बाद में उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि जिस दोषी की फांसी की दया याचिका लंबे समय तक लंबित रही हो, वह फांसी की सजा को उम्र कैद में तबदील करने की मांग कर सकता है।
उसने याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा त्रिवेणी बेन बनाम गुजरात सरकार एवं अन्य के मामले के फैसले का हवाला देते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में बदले जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने त्रिवेणी मामले में अपने फैसलेे में कहा था कि यदि फांसी की सजा के मामले में दया याचिका पर लंबे समय तक फैसला नहीं होता तो दोषी फांसी की सजा उम्रकैद में बदले जाने की मांग कर सकता है।
धर्मपाल ने अपनी याचिका में कहा था कि उसकी दया याचिका भी 14 साल तक राष्ट्रपति के पास लंबित रही, इसलिए उसकी सजा को उम्रकैद में तबदील किया जाए। इस दलील के बाद छह अप्रैल 2013 को हाईकोर्ट ने उसकी फांसी पर रोक लगाई थी और इसी रोक को सोमवार को भी जारी रखा गया है।