राजवंत शेरगिल महात्मा गांधी वैलफेयर संगठन पंजाब के चेयरमैन एवं कांग्रेसी नेता था। इस कारण सरकार द्वारा उसे सुरक्षा मुहैया करवई गई थी। किन्ही कारणों से जब भी राजवंत की सुरक्षा वापस ली जाती, तभी उस पर हमला हो जाता था। जिससे चलते शेरगिल एवं परिवार हमेशा तनाव में रहता था।
सितंबर 2012 में गिल्को वैली में आयोजित एक विवाह समारोह में शेरगिल के गनमैन ने तैश में आकर पंजाब पुलिस के एसपी जसदेव सिंह पर गोली चला दी थी।
तब वह अधिकारी तो बाल-बाल बच गए थे, लेकिन वारदात के बाद शेरगिल की सुरक्षा वापस ले ली गई। इसके बाद से शेरगिल ने सरकार से निरंतर कहा कि उसकी जान को खतरा है। सुरक्षा मुहैया कराई जाए। लेकिन सुरक्षा नहीं मिली।
2013 में भी हुआ था हमला
चमकौर साहिब के निकट 17 मार्च 2013 को अज्ञात बाइक सवारों ने उसकी चलती कार पर फायरिंग कर जानलेवा हमला किया। तब गोली उसके बाजू में लगी थी। उस समय में अस्पताल में उपचाराधीन शेरगिल ने कहा था कि उस पर आतंकी हमला हुआ है। तब अटकलें लगीं कि शेरगिलन सुरक्षा वापस लेने के लिए खुद पर हमला कराया होगा।
शेरगिल ने उस समय बताया था कि वर्ष 2009, 2011 एवं 2012 में निरंतर आतंकी संगठन बब्बर खालसा की धमकियों भरे पत्र मिल रहे थे, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान ही नहीं दे रही थी। बाद में उसे सुरक्षा मिल गई। अभी एक सप्ताह पूर्व ही सुरक्षा वापस ली गई। इसके बाद उसका कत्ल हो गया।
एक सप्ताह पहले सुरक्षा वापस ली गई थी
पुलिस सूत्रों के अनुसार एक सप्ताह पूर्व ही राजवंत की सुरक्षा उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार वापस ली गई थी। लेकिन उसे अस्थाई सुरक्षा खरड़ सिटी थाना से मुहैया कराई जा रही थी।
कुछ दिन पूर्व वह शहर से बाहर गया, तो पुलिस ने खरड़ सिटी थाना से सुरक्षा कर्मी उसके साथ भेजे थे। लेकिन इस बार राजवंत ने शहर से बाहर जाने से पूर्व पुलिस का सूचित ही नहीं किया। इस कारण उसके पास सुरक्षा नहीं थी, जिसका कातिल ने पूरा फायदा उठाया।
सभी कोई था गमगीन
मोहाली में कांग्रेसी नेता राजवंत सिंह शेरगिल की हत्या के बाद उसके खरड़ मेन बाजार में स्थित निवास पर गमगीन माहौल था। परचित, नेता एवं रिश्तेदार वहा पहुंच रहे थे। परिवार सदमे में था। 35 वर्षीय मृतक राजवंत सिंह शेरगिल विवाहित था।
पत्नी अमनप्रीत कौर सरहिंद के पास कान्टीनेंटल ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में प्रिंसीपल हैं। नौ वर्षी बेटा अर्शवीर मोहाली के एक स्कूल में पढ़ता है। मृतक के पिता नरिंदर सिंह के अनुसार वह अक्सर अपने गांव माछीपुर में रहते हैं। बाकी परिवार खरड़ में रहता है।
बुधवार सूबह 7:30 बजे के करीब पुलिस कर्मी उनके घर आए और बताया कि उनके बेटे का कत्ल हो गया है। उन्होंने बताया कि उनकी बहू बुधवार सुबह घर से कॉलेज के लिए निकली थी। रास्ते में उसे सूचित किया गया, तो वह लौट आई। उनका पोता अर्शवीर स्कूल गया था, जो इस बात से अनजान था कि उसके पिता अब दुनिया में ही नहीं रहे।
मंगलवार को बेटे का था जन्मदिन, सभी करते रहे इंतजार
भाई कुलवंत सिंह एडवोकेट के अनुसार राजवंत रविवार को घर पर दिल्ली जाने की कह कर गया था। मंगलवार को राजवंत के बेटे का 9वां जन्मदिन था। पूरे दिन एवं शाम को भी राजवंत के फोन पर संपर्क करना चाहा।
फोन पर घंटी बज रही थी, लेकिन कोई उठा नहीं रहा था। पिता के अनुसार शाम 7:30 बजे के करीब किसी ने उसका फोन उठाया एवं काट दिया। फिर फोन बंद हो गया। सारा परिवार उसके घर आने की राह ताकता रहा।
वृद्ध दादी को नहीं बताया
92 वर्षीय दादी को जब पता चला कि उसके जवान पौते के साथ कुछ अनहोनी हुई है, तो वह पाठ करने बैठ गईं एवं शाम तक उसकी सलामती की दुआ मांगती रहीं।
किसी ने भी उसे बताने की हिम्मत नहीं जुटाई कि पोते की मौत हो चुकी है। शव घर आने पर ही दादी को पता चला कि राजवंत नहीं रहा।
यादगार बनकर रह गई पूर्व प्रधानमंत्री के साथ शेरगिल की तस्वीर
शेरगिल के घर के अंदर दाखिल होते ही उसके दफ्तर के बाहर एक तस्वीर लगी थी। जिसे घर में दाखिल होने वाला हर शख्स देख रहा था।
यह तस्वीर थी शेरगिल की, जो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फूल भेंट करते दिख रहे हैं। घर के बाहर दीवार पर लगी इस तस्वीर पर सबकी नजर पड़ रही थी, जो एक यादगार बनकर रह गई।