महिलाओं के लिए सुरक्षित माने जाने वाले चंडीगढ़ में नाबालिग लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। 2016 के मुकाबले 2017 में दुराचार के मामले बढ़े हैं। 2016 में जहां 18 साल से कम उम्र की लड़कियों से जुड़े मामलों में 39 फीसदी कोर्ट से तय हुए, वहीं 2017 में यह 53 फीसदी तक तय हुए। वहीं इन मामलों में रोचक पहलू यह है कि 95 फीसदी मामलों में आरोपी/दोषी पीड़िता के जानकार हैं। वहीं इस साल के शुरुआती दो महीनों में ही नाबालिगों से दुराचार के 72 फीसदी मामलों में फैसला आ चुका है।
विशेष कोर्ट में नाबालिगों से जुड़े 29 में से 21 केसों में अदालत फैसला सुना चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन साल में नाबालिगों से दुराचार के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। महिला अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष कोर्ट ने 2015 में 36.5 फीसदी, 2016 में 39 फीसदी और 2017 में 53 फीसदी केस तय किए। विशेष कोर्ट ने फरवरी 2014 में गठित होने के बाद पहले साल दुराचार से जुड़े 96 केस में फैसला सुनाया, जिनमें से 35 नाबालिगों से जुड़े थे।
इसके बाद 2015 में 82 केस जिनमें 30 में पीड़िता नाबालिग थी। 2016 में 105 रेप केस में फैसला सुनाया गया। इनमें 41 नाबालिगों से जुड़े थे। वर्ष 2017 में दुराचार के मामलों में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि देखी गई। इस साल 131 दुराचार के मामलों में विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। इनमें 70 फीसदी केसों में पीड़िता नाबालिग थी।
बरी होने का कारण पीड़िता का होस्टाइल होना
विशेष कोर्ट में सजा के मुकाबले बरी होने वालों का प्रतिशत अधिक है। इसका कारण अधिकांश मामलों में पीड़िता का होस्टाइल होना है। ऐसे मामलों में पीड़िता आरोपी को कोर्ट में पहचानने से इंकार कर देती हैं या फिर पुलिस और 164 के बयान के उल्ट गवाही देती हैं। शिकायतकर्ता या पीड़िता के होस्टाइल होने से अभियोजन पक्ष के लिए भी आरोप साबित करना मुश्किल हो जाता है।
चंडीगढ़ सभी यूटी में नाबालिगों से दुराचार में दूसरे नंबर पर
आंकड़ों के मुताबिक नाबालिगों से दुराचार या शारीरिक छेड़छाड़ के मामलों में आरोपी पीड़िता का जानकार ही होता है। कुछ मामलों में तो पीड़िता परिवार के ही किसी सदस्य की घिनौनी हरकत की शिकार बनती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में दर्ज नाबालिगों से दुराचार के 94 फीसदी मामलों में आरोपी पीड़ित के जानकार थे। चंडीगढ़ सभी यूटी में नाबालिगों से दुराचार के मामलों में दूसरे नंबर पर है। वहीं देशभर में महिलाओं के प्रति आपराधिक मामलों में 11वें नंबर पर है।