तीन साल नौ महीने की बच्ची का घर के बाहर से अपहरण होना और 12 घंटे बाद लाश मिलने की सूचना मिलते ही मां बेहोश हो गई। परिजनों की दुआ और डॉक्टरों की दवा से होश तो आ गया, लेकिन बिटिया की चहलकदमी याद करते हुए अब तक आंखों से आंसू नहीं थमे।
अब मुंह से तो एक ही बात निकलती है कि न तो बेटी रही और न ही उसकी पायल की झनकार। यही वह पायल थी, जो बच्ची की जिद पर उसे दो दिन पहले पहनाया गया था और इसी पायल से जंगल में बच्ची के शव की पहचान हुई थी।
यह दर्द है कॉलोनी नंबर-4 में रहने वाली उस मां का, जिसकी बेटी को दरिंदों ने मार डाला। वारदात के दूसरे दिन ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बच्ची की मां ने अपनी पीड़ा को बयां किया।
इस घटना से टूट चुकी बच्ची की मां ने बताया कि घर में मेरी बेटी सबसे छोटी थी। बहुत जिद्दी और तेज भी। कुछ दिनों पहले उसने पड़ोस में किसी बच्ची के पैर में चांदी की पायल देखी। चाहती थी, काश! उसे भी ऐसी पायल मिले।