चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में जिला अदालत ने दिल्ली की रायडर मैटिक बिवल गियर्स प्रा. लि. के डायरेक्टर एसके कुकरेजा को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें प्रत्येक केस में एक-एक साल कैद की सजा सुनाई है।
साथ ही इन केस में मुआवजा रकम के तौर पर जो चेक बाउंस की रक म थी, 95.46 लाख रुपये चुकाने के आदेश दिए हैं। सह आरोपियों के तौर पर डायरेक्टर की पत्नी ज्योति कुकरेजा और पवन चावला भगोड़े करार हैं।
केस में हिम टेक्रोफॉर्ज लिमिटेड कंपनी की ओर से मैनेजर सर्बजीत सिंह ने संबंधित आपराधिक शिकायत वर्ष 2012 में दर्ज कराई थी। उन्होंने चेक बाउंस के मामलों में रायडर मैटिक बिवल गियर्स प्रा. लि. के डायरेक्टरों ज्योति कुकरेजा, एसके कुकरेजा और पवन कुमार चावला को पार्टी बनाया था।
यह है मामला
रायडर मैटिक के डायरेक्टरों ने खुद को मलयेशिया स्थित एक प्लांट का मालिक बताया था। उन्होंने यह प्लांट बेचने के लिए हिम टेक्रोफॉर्ज को ऑफर किया था। इसकी डील 10.75 करोड़ रुपये में हुई थी। एसके कुकरेजा और ज्योति कुकरेजा ने 18 जून 2008 को एक एमओयू साइन कर शिकायतकर्ता से एक करोड़ रुपये लिए थे।
शिकायतकर्ता को पता चला कि दोनों आरोपियों ने प्लांट की मुख्य मशीनें और महत्वपूर्ण पार्ट्स किसी अन्य कंपनी को बेच दिए हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि वह प्लांट आरोपियों ने किसी और को बेच दिया है। उसने इस बारे में उनसे बातचीत की तो ज्योति और एसके कुकरेजा ने शिकायतकर्ता को प्लांट में बचे हुए मशीनरी समेत अन्य औजार बेचने का ऑफर दिया, जिनकी कीमत 2.75 करोड़ रुपये बताई गई।
इसके बाद दोनों पक्षों में एक और एमओयू साइन हुआ। कुछ दिन बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि जो मशीनरी और अन्य सामान उसे बेचा गया है वह बैंक में गिरवी हैं। डीबीआरटी के आदेश पर वह प्रॉपर्टी अटैच कर दी गई थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपियों ने उनके पैसे वापस करने को कहा।
इस पर उन्होंने उस रकम के चेक दिए, जो बाउंस हो गए। इस पर शिकायतकर्ता ने 6 अगस्त 2011 को सेक्टर-26 थाने में कंपनी के तीनों डायरेक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत केस दर्ज करवाया था। इस पर पुलिस ने ज्योति कुकरेजा और एसके कुकरेजा को गिरफ्तार कर लिया था।