सेक्टर 16 हास्पिटल में पत्नी डिंपल की गोली मारकर हत्या करने वाले कांस्टेबल आनंद को अपने किए पर पछतावा नहीं है। अस्पताल में एडमिट आनंद से जब पूछा गया कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया तो उसने बताया कि डिंपल अक्सर मायके चली जाती थी।
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बिना बताए काफी दिन तक वहां रहती थी। उसे मना किया जाता था, लेकिन फिर भी वह बात नहीं मानती थी। बार-बार डिंपल के चले जाने से बच्चे परेशान हो जाते थे। बच्चों का परेशान होना मुझसे देखा नहीं जाता था।
‘बॉक्सर से शादी हुई है, यह तो होगा ही’
डिंपल के चेहरे पर अक्सर चोट के निशान होते थे। दूर से ही पता चल जाता था कि उसे किसी ने बेरहमी से पीटा है। जब भी उसे कोई चोट के निशान के बारे में पूछता तो वह हंसकर टाल देती थी।
डिंपल की भाभी शीला ने बताया कि जब वह उससे मिलने जाती थीं तो उसके चेहरे पर चोट के निशान होते थे। पूछने पर वह कहती थी कि बॉक्सर से शादी हुई है, ये तो होगा ही। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि पिछले तीन साल से तो उसके पति आनंद ने सारी हदें पार कर दी थीं। वह डिंपल को ज्यादा परेशान करने लगा था। डिंपल की तनख्वाह भी वह अपने पास रख लेता था। एटीएम तक नहीं देता था। कुछ दिन पहले बच्चों का बर्थ-डे था। बच्चों के लिए कपड़े भी खुद ही डिंपल ने खरीदे थे।
मरीजों को हुई परेशानी
सेक्टर 16 में फायरिंग के बाद पुलिस और हास्पिटल की सिक्योरिटी ने इमरजेंसी के गेट बंद कर दिए थे। इससे करीब एक घंटे तक मरीजों व उनके परिजनों को थोड़ी परेशानी हुई।
हालांकि पुलिस व हास्पिटल स्टाफ ने सिक्योरिटी को देखते हुए उसे बंद किया था। इमरजेंसी मरीजों के लिए एंट्री खुली हुई थी। करीब एक बजे गेट इमरजेंसी का गेट भी खोल दिया गया।
परिजनों में पुलिस के खिलाफ रोष
डिंपल की मां कैलाशो भी इसी अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। डिंपल की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा भी किया। वे मांग कर रहे थे कि उन पुलिस कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने शिकायत देने के बाद भी रिवाल्वर वापस लेने में लापरवाही बरती। इसी वजह से उनकी बेटी की हत्या हुई।
प्रत्यक्षदर्शी ने जो देखा
प्रत्यक्षदर्शी सतनाम सिंह ने बताया कि आनंद और डिंपल पहले अस्पताल की कैंटीन के पास खड़े थे। दोनों बहस करते हुए न्यू ओपीडी के बाहर पहुंच गए। वहां पति ने पत्नी पर गोलियां दागीं। दो गोलियां उसने खुद पर भी चलाईं और उसके बाद भागने लगा तो मौके पर तैनात एक कांस्टेबल ने उसे रोक लिया।
समझौता करवाकर वापस भेज देते थे परिजनों के अनुसार वूमेन सेल और रिश्तेदारों की पंचायत में कई बार डिपंल और आनंद का मामला पहुंचा था, लेकिन हर बार समझौता करवाकर उन्हें वापस भेज दिया जाता। परिजनों का कहना है कि डिपंल उसके साथ जाने के लिए तैयार नहीं थी लेकिन पति हर बार बच्चों और घर बसाने का हवाला देकर ले जाता था।
डिपंल की बहन सुष्मा ने बताया कि वर्ष 2004 में दोनों की शादी हुई थी। डिंपल को ही सेक्टर-24 में सरकारी मकाल अलाट है। इसी में दोनों पति-पत्नी रहते हैं। उनके दो जुड़वां बच्चे 8 साल का बेटा कशिश और बेटी काव्या है। सुष्मा के अनुसार आनंद अकसर डिंपल से मारपीट करता था। आनंद बॉक्सर है और स्पोर्ट्स कोटे से ही उसकी भर्ती चंडीगढ़ पुलिस में हुई थी।
दो माह पहले आ गई थी मायके डिंपल की मां का घर भी सेक्टर-24 में पास ही है। सुष्मा के अनुसार दो महीने पहले आनंद की प्रताड़ना से तंग आकर डिंपल मायके आ गई थी। डिंपल ने दहेज प्रताड़ना और तलाक का मामला भी कोर्ट में डाल रखा था। डिंपल के पिता मामचंद भी पीजीआई से सेवानिवृत्त हैं। मामचंद ने बताया कि डिंपल अपने दोनों बच्चों को साथ ले आई थी मगर कुछ दिन पहले आनंद बेटे को अपने साथ ले गया था। वह डिंपल को इतना मारता था कि कई दिन तक उसके चेहर पर निशान रहते थे।