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बाबा रामदेव ने बताया था, रेप पीड़िता कौन?

Wed, 12 Nov 2014 11:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के खुड्डा लाहौरा की 10वीं क्लास की एक लड़की ने आरोप लगाया था कि पीसीआर में तैनात पांच पुलिस वाले करीब दो महीने तक उससे दुराचार करते रहे।
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इस मामले को सेक्टर-17 पुलिस ने दर्ज किया था और मौके पर दो आरोपी पुलिस वालों को गिरफ्तार भी किया गया था। जब दबाव में आकर लड़की ने सुसाइड करने की कोशिश की तो यह घटना सामने आई।

उस समय उसके भाई ने उसे बचाया था। लड़की के भाई ने अपने एरिया काउंसिलर सौरभ जोशी की मदद से पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज करवाई।

यह आरोप लगाया गया था कि लड़की के घर एक विवाद को निपटाने आए पीसीआर के एक कांस्टेबल ने उससे दोस्ती की और मिलना-जुलना शुरू कर दिया। इसमें उसके अन्य चार साथी भी शामिल थे।
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बहाली के लिए अपील करेंगे आरोपी

रेप का आरोप लगने के बाद आनन-फानन में नौकरी बर्खास्त किए गए पांच पुलिस कर्मी इस फैसले के खिलाफ कानूनी राय लेने के बाद अपील करेंगे। इन आरोपियों ने कहा कि उनके और परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। इसमें उनको प्रताड़ना झेलनी पड़ी। हिम्मत के पिता सतीश कुमार ने उनको बहाल करने की अपील की।

इन सभी का कहना है कि अभी बरी हुए हैं, उसके बाद ही देखेंगे। बीएसएफ में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत सतीश ने कहा कि उनको मामले के लिए कामकाज छोड़कर अदालत में ज्यादा समय गुजारना पड़ा। उनके बेटे का कोई दोष नहीं था। आरोपी अनिल की पत्नी और पुलिस कांस्टेबल कविता के चेहरे पर पति के बरी होने की खुशी देखने वाली थी।  

हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं था
पीड़िता के संग प्रेम संबंध और दुष्कर्म के सवाल पर अक्षर ने व्यक्तिगत बताते हुए कहा कि उनके बीच में कोई ऐसी बात नहीं थी। तभी तो उन्हें बरी किया गया है।

मेरे साथ अन्याय हुआ : भाई
अदालत में सुनवाई के दौरान बयान बदलने वाली पीड़िता के भाई ने फैसला आने के बाद कहा कि उसके साथ अन्याय हुआ है। वह इसके खिलाफ अपील करेंगे।

यहां से पलटना शुरू हुआ मामला

लैब रिपोर्ट हुई फेल
सभी कांस्टेबलों पर आरोप साबित करने के लिए भेजी गई लैब रिपोर्ट फेल हो गई। इस मामले में सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में भेजे गए पीड़ित के स्वैब आरोपी के डीएनए से मैच नहीं हुए। इस मामले में आरोपी के कपड़ों पर किसी प्रकार के सीमेंस नहीं मिले थे।

पीड़िता बयानों से पलटी
पीड़िता ने जिला अदालत में कहा कि वह सिर्फ आरोपी अक्षय को ही जानती है बाकी आरोपियों से उनका कोई लेना देना नहीं है। इन्हें उसने पहले कभी नहीं देखा है। वह अक्षय से शादी करना चाहती थी। उसके साथ उसकी दोस्ती थी। 20 दिसंबर को सीआरपीसी की धारा-164 के तहत जो बयान दर्ज हुए, वे उसने दबाव में आकर दिए। उस पर लोगों का दबाव था और उसे सीखा कर भेजा गया था।

दोबारा बयान दर्ज कराने को कहा, बोली- कांस्टेबल की पत्नी ने बनाया दबाव
पीड़िता ने अदालत में पेश होकर मामले में दोबारा बयान दर्ज करने की अर्जी दायर की। इसमें उसने कहा था कि उस पर कांस्टेबल अनिल की पत्नी कविता समेत अन्य परिजनों ने बयान पलटने का दबाव बनाया था।

रिकार्डिंग की सीडी दी
अदालत को चार सीडी दी गईं। इनमें एक आरोपी की लेडी कांस्टेबल पत्नी और संबंधियों की ओर पीड़िता पर दबाव बनाए जाने की रिकार्डिंग दर्ज होने का दावा किया गया है। पीड़िता ने साथ ही हस्तलिखित अर्जी देकर कहा कि उसे इस मामले में इंसाफ दिया जाए।

दो माह बाद पेश हुई चार्जशीट

गैंगरेप के मामले में पुलिस ने दो माह बाद जिला अदालत में चालान पेश किया था। इसके अनुसार दुराचार और छेड़छाड़ के मामले में पांच पुलिसकर्मी आरोपी बताए गए थे। पुलिस द्वारा पेश किए चालान में कांस्टेबल अक्षय और सुनील पर दुराचार की धारा लगाई गई थी और अन्य तीन पर छेड़छाड़ की धारा लगाई गई। सभी पांचों आरोपियों पर पास्को एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे।

न डीएनए मिला, न उम्र साबित हुई
खुड्डा लाहौरा की दसवीं कक्षा की छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में पांच कांस्टेबल अभियुक्त बनाए गए थे। इनमें अक्षय, सुनील और अनिल, हिम्मत और जगतार शामिल रहे। चंडीगढ़ पुलिस ने अक्षय और सुनील पर दुराचार की धारा लगाई, तीन अन्य पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया। पांचों आरोपियों पर पास्को एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे।

पीड़िता के बार बार बयान बदलने और सीएफएसएल रिपोर्ट में डीएनए के मिलान न होने और पीड़िता की उम्र साबित न होने के कारण अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया। इस हाईप्रोफाइल केस में अभियोजन पक्ष के आरोप साबित नहीं हो सके।

ये रही पूरे केस की टाइम लाइन

19 दिसंबर 2013-पुलिस ने एफआईआर रजिस्टर की20 दिसंबर 2013-सभी पांच आरोपी गिरफ्तार, सर्विस से बर्खास्त21 दिसंबर 2013-एसआईटी का गठन21 फरवरी 2014-चार्ज शीट फाइल की गईसितंबर-सीएफएसएल रिपोर्ट आई थी

भीड़ लेकर पीड़िता से मिलने पहुंचे थे रामदेव

खुड्डा लाहौरा गैंगरेप केस में पीड़िता और उसके परिवार को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ी थीं। पीड़ित पक्ष के अनुसार बाबा रामदेव भारी भीड़ और पुलिस अधिकारियों के साथ उनके घर पहुंचे।

पूरा परिवार अपमानित हुआ और मजबूरन उन्हें अपना पुश्तैनी घर बेचना पड़ा। वे जहां भी घर लेते हैं, पुलिस के दबाव में मकान मालिक जल्द ही उनसे घर खाली करवा लेता।

पीड़िता की पहचान उजागर होने पर युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष हरमेल केसरी ने पुलिस में बाबा रामदेव की शिकायत की लेकिन यह जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। बाबा रामदेव ने घर आकर मदद देने का वायदा किया और मीडिया में वाहवाही लूटी।
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पीड़िता के भाई ने जांच टीम पर आरोप लगाए थे

पुलिस थाने में अधिकारियों ने उनकी बहन पर आरोपी पुलिस कर्मचारियों के साथ समझौता करने का दबाव बनाया गयापीड़िता के बयान दर्ज करते समय आरोपी अक्षय और सुनील को सामने बैठाया गया।दोनों आरोपियों को कुर्सी पर बैठाया गया, जबकि पीड़िता और उसके भाई को नीचे कौने में बैठने को कहा।तत्कालीन जांच अधिकारी ने कहा कि यह बलात्कार नहीं प्रेम प्रसंग का मामला है।तत्कालीन जांच अधिकारी का व्यवहार पीड़िता के प्रति सही नहीं था। इसकी जांच करवाई जाए।उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है, मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया, जिन पर दबाव बनाने का आरोप है।
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