मोहित ने आरोपियों को 12.5 लाख रुपये की रिश्वत दे दी और आगे के रुपये देने से इन्कार किया। इस पर दोनों आरोपी दबाव बनाने लगे। मोहित ने इस संबंध में चंडीगढ़ सीबीआई को शिकायत दे दी। उसकी शिकायत पर चंडीगढ़ सीबीआई ने जाल बिछाकर 7 मार्च 2021 को 10 लाख रुपये रिश्वत लेने के लिए अनिल को बुलाया। उसके साथ दिलबाग भी आया था। सीबीआई ने उसी समय दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद पूछताछ में पता चला कि इस मामले को रचने में अमरोज सिंह, उसके रीडर मंदीप और दो अन्य आरोपियों का हाथ था।
फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई
उस दौरान सीबीआई के पास अमरोज सिंह व मंदीप के खिलाफ सबूत नहीं थे लेकिन जांच एजेंसी ने वॉयस रिकॉर्डिंग व अन्य सबूत फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे थे। फॉरेंसिक जांच में इन दोनों के खिलाफ सबूत मिले और सीबीआई ने दोनों को दबोच लिया।
सीएम हेल्पलाइन का कॉर्डिनेटर रहा है अमरोज
अमरोज की पढ़ाई आर्मी स्कूल से हुई है। वह आर्मी और आयकर विभाग में अच्छे पदों पर रहा है। वह भ्रष्टाचार के खिलाफ बनाई गई सीएम हेल्पलाइन नंबर का को-आर्डिनेटर रहा है। इस समय वह मोहाली पुलिस के इंटेलिजेंस विंग में कार्यरत्त था।
डीएसपी बनते ही की थी रिश्वत लेने वालों पर कार्रवाई
अमरोज की जहां भी तैनाती हुई मंदीप उसके साथ ही रहता था। जीरकपुर में डीएसपी रहने के दौरान मंदीप उसका रीडर था, उसके बाद मोहाली में डीएसपी पद पर तैनात रहते हुए भी मंदीप उसके साथ ही रहा। पंजाब पुलिस में अमरोज को काफी तेज माना जाता है, इसलिए आईटी से जुड़े कार्यों में भी उसका सबसे ज्यादा हाथ रहता था। यही कारण था कि अमरोज कई अधिकारियों का चहेता भी था। दूसरी ओर मोहाली का डीएसपी बनने के बाद अमरोज सिंह ने चंडीगढ़-खरड़ हाइवे पर रिश्वत ले रहे पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया था।