बीस लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ी सीआईए टीम को पुलिस ‘ऊपरी दबाव’ के चलते बचाने के प्रयास में दिख रही है। यमुनानगर जिले के जगाधरी थाने के सीआईए-टू के एएसआई अशोक के साथ आए एक एएसआई, दो ईएएसआई व एक सिपाही को विजिलेंस ने बृहस्पतिवार को यह कहते हुए छोड़ दिया किया ये बेकसूर हैं और अशोक के कहने पर हिसार आए थे।
रिश्वत मामले की इन्हें भनक तक नहीं थी। पुलिस ने इन चारों को राउंड अप किया था, जबकि अशोक व बिचौलिए राजेश की गिरफ्तारी दर्शाई थी। वे दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
सूत्रों का दावा है कि रिश्वत की इतनी बड़ी डिलिंग करना अशोक के बस की बात नहीं है। पूरे मामले में यमुनानगर पुलिस महकमे के उच्चाधिकारियों के संलिप्त होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसी के चलते विजिलेंस के उच्चाधिकारी इस मामले को अधिक तूल नहीं दे रहे। इतना ही नहीं रिश्वत के आरोप में पकडे़ गए एएसआई अशोक के सहकर्मियों को भी उच्चाधिकारियों के दबाव में ही छोड़े जाने की बात सामने आ रही है।
स्मगलिंग रोके पुलिस
विजिलेंस टीम के सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि उच्चाधिकारियों का पूरा दबाव है। अगर स्मगलिंग का गोरखधंधा करने वालों ने पुलिस को मोहरा बनाया है तो पहले तो पुलिस इस दो नंबर के धंधे को रोके न कि रिश्वत मांगे।
क्यों नहीं करवाया मामला दर्ज
विजिलेंस सूत्रों का कहना है कि सीआईए टीम द्वारा इस पूरे प्रकरण में रिश्वत लेने का मामला साफ झलक रहा है। 26 जनवरी को भोपाल में अगर शराब ठेकेदार की गाड़ी लूटी गई थी तो उन्होंने वहां मामला दर्ज क्यों नहीं करवाया? एक सवाल यह भी है कि लूट की वारदात हकीकत है तो यमुनानगर पुलिस का बिना एफआईआर दर्ज किए किसी से रुपये मांगने का क्या मतलब है?