हजारों करोड़ रुपये से जुड़े बिटकॉइन घोटाले में चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल के हाथ आखिरकार मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज और उसके साथी विवेक भारद्वाज, पंकज अदलखा और हेमंत भोपे लग गए। गुरूवार को दिल्ली पुलिस चारों आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर चंडीगढ़ लेकर आई। साइबर सेल ने चारों आरोपियों को सीजेएम अक्षदीप महाजन की कोर्ट में पेश किया। साइबर सेल ने चारों का अदालत से दस दिन का रिमांड मांगा हालांकि बचाव पक्ष की दलीलों के बाद अदालत ने चार दिन के रिमांड पर भेज दिया।
बिटकॉइन घोटाले के मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज, उसका भाई विवेक भारद्वाज, अमित की कंपनी गेन बिटकॉइन में मार्केटिंग मैनेजर पंकज अदलखा और हेमंत भोपे को सबसे पहले पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद ये चारों अलग-अलग राज्यों की पुलिस कस्टडी में रहने के बाद अब चंडीगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। चारों के नाम चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर में दिल्ली से गिरफ्तार संचित अलाग और राजेश कुमार बरदिया उर्फ राजू ने पुलिस को बताये थे।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि संचित और राजेश ने अलग-अलग कंपनियों के नाम से बैंक खाते खोले हुए थे। ये कंपनियां केवल कागजों में ही चल रही थी। मामले के शिकायतकर्ताओं ने इन फर्जी कंपनियों के नाम पर खुले बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए थे। ये बैंक खाते दिल्ली स्थित कंपनियों के थे। केवल कागजों में चलने वाली इन कंपनियों को राजू और संचित ऑपरेट करते थे।
अन्य कंपनियों में पैसे होते थे ट्रासफर
bitcoin
एक शिकायतकर्ता ने बिटकॉइन में निवेश के लिए जिस बैंक खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे वह दिल्ली स्थित गोल्ड ओवरसीज कंपनी के नाम पर दर्ज था। यह कंपनी राजेश कुमार उर्फ राजू संचालिक कर रहा था। इस कंपनी से पैसा डीएम ट्रेड इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड में ट्रांसफर किया गया था। इसे भी राजू ही चला रहा था।
इन दोनों कंपनियों से पैसा स्विच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड में ट्रांसफर किया गया था। इसका डायरेक्टर संचित है। जांच में सामने आया कि ये लोग आगे बिटकॉइन मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज की गेन बिटकॉइन समेत अन्य कंपनियों में पैसे ट्रांसफर करते थे।
विवेक भारद्वाज अमित का भाई है। वहीं पंकज अदलखा अमित की कंपनी गेन बिटकॉइन में मार्केटिंग मैनेजर है। वह उसके लिए निवेशक लेकर आता था। हेमंत भोपे भी अमित की कंपनी के लिए निवेशक लाता था और बदले में लाखों रुपये कमिशन लेता था। चारों के खिलाफ चंडीगढ़ साइबर सेल के पास लाखों रुपये की ट्रांजेक्शन के सबूत हैं।
यह है मामला
चंडीगढ़ पुलिस को दी शिकायत में सेना से रिटायर्ड कर्नल ने कहा था कि, वर्ष 2016 में उनकी मुलाकात अमित और अजय भारद्वाज समेत अन्य से विशाल कादियान ने दुबई में करवाई थी। उन्होंने शिकायतकर्ता को बिटकॉइन में पैसा लगाकर कुछ ही समय में बहुत तगड़ा मुनाफा कराने का लालच दिया था। उन्होंने बिटकॉइन खरीद इसे माइनिंग के क्षेत्र में लगाने की बात कही थी। इसके बाद रिटायर्ड कर्नल ने अमित और अजय के खातों में डेढ़ से दो करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे।
इससे अमित ने उनके लिए बिटकॉइन खरीदे थे और इन्हें माइनिंग में लगाने की बात कही थी। लेकिन, जब मार्च में पुणे पुलिस ने अमित और अजय को बिटकॉइन से जुड़े 30 हजार करोड़ रुपये के घोटाले में गिरफ्तार किया तो रिटायर्ड कर्नल को भी खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन अपने बिटकॉइन की जानकारी ली तो उनके ऑनलाइन खाते में एक भी बिटकॉइन नहीं था। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी।
दिल्ली से दुबई, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया भेजा जा रहा था पैसा
बिटकॉइन
- फोटो : amar ujala
पैसा निवेश करने वाले लोगों को एजेंट अमित से मिलवाते थे। इसके बाद वह उन्हें पैसे जमा करवाने के लिए बैंक खाते बताते थे। यह बैंक खाते संचित और राजू की शेल कंपनियों के नाम पर चल रहे थे। इनकी कंपनियों से पैसे कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर होते हुए अमित की तीनों कंपनियों में ट्रांसफर होते थे। इसके अलावा यह दोनों दुबई, मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर में भी पैसा भिजवाते थे। इसी पैसे से बाद में बिटकॉइन खरीदे जाते थे और अमित ही उन्हें आगे माइनिंग में निवेश कर निवेश करने वालों से हर महीने एक तय लाभ देने की बात कहते हुए 18 महीने का कान्ट्रेक्ट करता था।
विवेक का पड़ोसी है संचित
संचित मास्टमाइंड अमित भारद्वाज के भाई विवेक भारद्वाज के दिल्ली स्थित घर के पास रहता है। विवेक ने ही उसे इस घोटाले में शामिल किया था। इसके बाद वह अमित के लिए काम करने लगा। विवेक ने ही संचित को दुबई में अमित से मिलवाया था। इसके बाद से वह कई बार दुबई उससे मिलने भी गया।