चंडीगढ़ में बैड ब्वॉयज गैंग का जाल चंद स्कूलों तक सीमित नहीं था। कान्वेंट, प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के 450 से अधिक स्टूडेंट्स गैंग के जाल में फंस चुके हैं। पुलिस के पास इस मामले में लगातार अभिभावकों और स्टूडेंट्स से शिकायतें मिल रही हैं। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
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वीरवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘रक्षासूत्र’ कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे डीएसपी (क्राइम) जगबीर सिंह ने बैड ब्वॉयज गैंग जैसी घटनाओं के प्रति बच्चों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि गैंग के सदस्यों ने काफी संख्या में बच्चों को धमकाया और पैसे वसूले है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अभिभावकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि विभाग गैंग के शिकार हुए बच्चों और अभिभावकों की काउंसिलिंग करेगा।
ड्रग्स गैंग स्कूली बच्चों को बना रहे निशाना
शहर के स्कूली बच्चों में ड्रग्स की लत काफी तेजी से बढ़ रही है। ड्रग्स गैंग स्कूली स्टूडेंट्स को शिकार बना रहे हैं। पुलिस ने ड्रग्स ले रहे 200 स्टूडेंट्स की लिस्ट तैयार की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ड्रग्स को स्कूली बच्चों में बीच पहुंचाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
डीसी आज प्रिंसिपल के साथ करेंगे मीटिंग बैड ब्वॉयज मामले में डीसी मोहम्मद शाईन शहर के विभिन्न स्कूल प्रिंसिपल के साथ शुक्रवार को मीटिंग करेंगे। बैठक में सभी प्रिंसिपल को इस मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी और प्रिंसिपल से सुझाव भी लिए जाएंगे।
अभिभावकों के लिए टिप्स -अभिभावक रूटीन में कुछ समय बच्चों को जरूर दें -बच्चे के व्यवहार में बदलाव पर उसे इग्नोर नहीं करें -पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) में जरूर जाएं -बेटे या बेटी के दोस्तों के बारे में पूरी जानकारी रखें -जरूरत पड़ने पर बच्चे की काउंसिलिंग कराएं।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करें
सोशल मीडिया अब आम जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। सोशल मीडिया ने लोगों के काम करने के तरीके और सूचनाओं की रफ्तार को तेज कर दिया है। आज के दौर में स्कूली बच्चे भी सोशल मीडिया से काफी जुड़े हैं। लेकिन, इसका इस्तेमाल करते हुए सभी को सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान के बारे में पूरी जानकारी होनी जरूरी है।
वीरवार को ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ द्वारा स्कूली स्टूडेंट्स को कानून और साइबर क्राइम से जुड़ी जानकारी देने के लिए आयोजित अमर उजाला ‘रक्षासूत्र’ कार्यक्रम में पहुंचे विशेषज्ञों ने यह विचार रखे।
सेक्टर-21 स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस विशेष वर्कशॉप में चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी (क्राइम) जगबीर सिंह विशेष अतिथि थे। साइबर सेल इंचार्ज इंस्पेक्टर जसपाल सिंह ने साइबर क्राइम से जुड़ी कई बेहतरीन जानकारी स्कूली बच्चों को दी। अमर उजाला के रेजिडेंट एडिटर संजय अभिज्ञान और जनरल मैनेजर धीरज रोमन भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
संजय अभिज्ञान ने कहा कि कई चीजों में बदलाव लाने के लिए आगे आना होगा। इसी कड़ी के तहत अमर उजाला ने रक्षासूत्र अभियान शुरू किया है। स्कूल प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र सिंह ने सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए अमर उजाला के प्रयासों की सराहना की।
स्कूली बच्चों को न चलाने दें वाहन
डीएसपी जगबीर के अनुसार, अक्सर कुछ नाबालिग जिग-जैग करते हुए बाइक चलाते हैं। ऐसे में अगर वे किसी हादसे का शिकार होते हैं या उनकी वजह से किसी और को चोट लगती है तो इसमें नाबालिग के साथ ही उसके परिजन भी जिम्मेदार माने जाएंगे। उन्होंने स्कूली बच्चों को 18 साल से पहले वाहन नहीं चलाने की सलाह दी।
गलती को छुपाएं नहीं परिवार या पुलिस से शेयर करें जगबीर सिंह ने कहा कि कई बार टीन एजर जाने अनजाने में कई गलतियां कर बैठते हैं। उन्हें पता भी नहीं होता कि वे कानून तोड़ अपराध कर रहे हैं। गलती होने पर उसे छिपाने की जरूरत नहीं। बल्कि, उसे परिवार या पुलिस के साथ साझा करें। तभी उसका बेहतर तरीके से हल निकाला जा सकेगा।
ईव टीजिंग को बर्दाश्त नहीं करें, शिकायत दें स्कूलों के बाहर ईव टीजिंग एक बड़ी समस्या है। इस समस्या के समाधान में छात्राओं की भागेदारी काफी महत्वपूर्ण है। डीएसपी जगबीर सिंह ने कहा कि स्कूल या घर के बाहर लगातार गाड़ी या बाइक पर चक्कर लगाने या तंग करने वाले का नंबर नोट कर स्कूल टीचर को सौंप दें। स्कूल प्रिंसिपल मामले को पुलिस तक पहुंचा देंगे।
इसके बाद कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है। अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामले में जरूरी नहीं की रिपोर्ट दर्ज की जाए। रिपोर्ट दर्ज होने पर भी छात्रा की पहचान उजागर नहीं की जाएगी।
घायल की मदद करने पर पुलिस नहीं करेगी परेशान
एक छात्र के सवाल पर डीएसपी जगबीर सिंह ने कहा कि किसी घायल की मदद करने पर पुलिस उस व्यक्ति को तंग नहीं कर सकती। भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सड़क हादसे में किसी घायल की मदद करने वाले को जांच के नाम पर तंग नहीं किया जा सकता। ऐसा करने पर संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हेल्पलाइन नंबर 1090- सीनियर सिटीजन से जुड़े मामलों के लिए 1091- महिलाओं के लिए 1098- चिल्ड्रन हेल्पलाइन 1073- ट्रैफिक संबंधी जानकारी 181- महिलाओं की मदद के लिए
- कोई धमकाए या परेशान करे तो फौरन स्कूल टीचर या पेरेंट्स को बताएं। - ईव टीजिंग के मामलों में छात्राएं चुप न रहें। पुलिस में कंपलेन करें। - किसी साथी को ड्रग्स लेते देखें तो चुप न रहें, स्कूल में सूचना दें। - सोशल साइट्स में किसी अनजान से दोस्ती करने से बचे - किसी तरह का अपराध हो जाने पर खुद जाएं पुलिस के पास। पुलिस मदद करेगी। - नशीले पदार्थ बेचने वालों के बारे में पुलिस को बताएं।
इन बातों का भी रखें ख्याल - 18 साल से कम उम्र के युवाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं दें। - फेसबुक पर फोटो अपलोड नहीं करें। - फेसबुक पर कहीं जाने का लगातार स्टेटस अपडेट नहीं करें। - अपने मोबाइल से अश्लील गाने या वीडियों नहीं भेजें। - एटीएम का पासवर्ड अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें।