पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज की समाधि को अवैज्ञानिक करार दिया है। साथ ही, 15 दिन के अंदर आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार के आदेश दिए हैं।
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शव के अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है। कमेटी में मुख्य सचिव व डीजीपी को शामिल किया गया है। कमेटी ये तय करेगी कि कैसे और कहां होगा संस्कार?
हाइकोर्ट ने आशुतोष महाराज का शव प्रदर्शित करने का भी दिया आदेश ताकि श्रद्धालु एवं रिश्तेदार उनके अंतिम दर्शन कर सकें। साथ ही, पंजाब सरकार को हिदायत दी है कि अगर राज्य सरकार इसमें असमर्थ रही तो उसके खिलाफ अवमानना का केस चलेगा। पंजाब सरकार को ये भी निर्देश दिए गए हैं कि आशुतोष जैसे मामलों में कानून बनाने पर विचार किया जाए।
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दिलीप झा की याचिका खारिज
गौरतलब है कि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने आशुतोष महाराज की मौत या समाधि मामले संबंधी अपना फैसला 28 अक्तूबर को सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट में एक याचिका आशुतोष महाराज के ड्राइवर पूर्ण सिंह ने दायर की थी। उस ने मांग की थी कि महाराज की मेडिकल जांच करके उनका अंतिम संस्कार किया जाए।
दूसरी याचिका, आशुतोष का पुत्र होने का दावा करने वाले दिलीप झा की है। दिलीप ने पुत्र होने के नाते आशुतोष का दाह संस्कार करने का अधिकार मांगा था। उसने यह भी मांग की थी कि कोर्ट सरकार को निर्देश दे कि आशुतोष से उसका डीएनए मिलान करवाए। हाईकोर्ट ने ये याचिका खारिज कर दी है।
28 जनवरी से समाधि में हैं महाराज
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के प्रमुख आशूतोष महाराज के शरीर को बीते सात महीने से संस्थान आश्रम में जेड श्रेणी की सुरक्षा के बीच ही रखा हुआ है।
पिछले सात महीने से जारी इस सुरक्षा कवच के बारे में अभी तक न तो स्थानीय पुलिस ने और न ही केंद्र सरकार ने समीक्षा करने की कोशिश की है। हालांकि इस अवधि के दौरान पंजाब सरकार भी हाईकोर्ट में यह जवाब दाखिल कर चुकी है कि आशुतोष महाराज ‘क्लीनीकली डेड’ हैं। लेकिन महाराज के अनुयायी इस बात पर कायम हैं कि आशुतोष महाराज की मृत्यु नहीं हुई है। वह समाधि में हैं और वापस शरीर में लौटेंगे।
सरकार ने हाईकोर्ट में बताया ‘क्लीनिकली डेड’
अनुयायियों का दावा है कि आशुतोष महाराज इस सात 28 जनवरी की रात 12 बजे ध्यान में लीन हो गए थे। अनुयायियों का यह भी दावा रहा है कि महाराज पहले भी कई-कई दिनों के लिए अपना शरीर त्याग कर समाधि में लीन हो जाते थे।
इस बार अनुयायियों के इस दावे में आशुतोष महाराज के एक वाहन चालक ने और फिर महाराज के बेटे ने हाईकोर्ट में चुनौती देकर आस्था और हकीकत के बीच नया विवाद खड़ा कर दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर पंजाब सरकार ने डाक्टरों के पैनल से राय ली।
सर्वप्रथम अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने महाराज की जांच की और उन्हें क्लीनिकल डेड घोषित कर दिया। फिर भी डेरा प्रबंधक और उनके अनुयायियों इस बात पर कायम हैं कि महाराज उच्च समाधि में लीन हैं।
दरअसल 28 जनवरी मंगलवार रात को साढ़े 12 बजे महाराज ध्यान में बैठे थे। उन्हें सांस लेने में कुछ दिक्कत हुई तो डेरा प्रबंधकों ने ही तत्काल चिकित्सकों की टीम को बुलाया। चेकअप के लिए अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों की टीम पहुंची, जिन्होंने रात को करीब ढाई बजे तक जांच की। उनकी नब्ज व दिल की धड़कन गायब थी।
डाक्टरों ने महाराज को क्लीनीकली डेड घोषित कर दिया। इसी आधार पर प्रदेश सरकार ने एक हलफनामा हाईकोर्ट में दायर तो कर दिया लेकिन आज तक आशुतोष महाराज को मिली हुई सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया।
आज भी उनके लिए जेड श्रेणी की सुरक्षा है, जिसके लिए सीआरपीएफ का एक सहायक सब इंस्पेक्टर, दो हेडकांस्टेबल, नौ कांस्टेबल तैनात किए हुए हैं। इनके साथ ही पंजाब पुलिस की तरफ से छह सहायक सब इंस्पेक्टर के अलावा 48 कांस्टेबल व हेडकांस्टेबल डेरे में तैनात हैं।