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ईडी के बाद अब विजिलेंस के जाल में फंसे डिंपी

Mon, 13 Apr 2015 12:42 AM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मनी लांडरिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय को बार-बार गच्चा देने वाले चंडीगढ़ टेरिटोरियल यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रधान विजय पाल सिंह डिंपी अब धोखाधड़ी के आरोप में फंस गए।
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डिंपी के अलावा इस्टेट ऑफिस चंडीगढ़ के कुछ अधिकारियों पर भी चंडीगढ़ सेक्टर-22 के एक एससीओ के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) में छेड़छाड़ करने का आरोप है। बहरहाल, चंडीगढ़ विजिलेंस डिपार्टमेंट ने डिंपी, इस्टेट ऑफिसर अश्वनी कुमार, जसुपदेश सिंह, गिरीश गोयल, शकुंतला रानी और प्रापर्टी के अन्य साझेदारों पर मामला दर्ज कर लिया है।

विजिलेंस विभाग ने जांच में पाया कि इस्टेट ऑफिस और प्रापर्टी डीलरों की मिलीभगत से ही प्रापर्टी की एनओसी में गड़बड़ी की गई है। इसलिए उनके खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के अलावा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के कई सेक्शन के तहत केस दर्ज किया गया है।
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गुरजीत ने डिंपी के साथ मिलकर लिया था एससीओ
मोहाली निवासी गुरजीत सिंह ने विजिलेंस को यह शिकायत दी थी। उन्होंने सेक्टर-22 का एससीओ नंबर तीन डिंपी के साथ मिलकर लिया था। गुरजीत का आरोप है कि जब उन्होंने एससीओ खरीदा तो पता चला कि डिंपी इस्टेट ऑफिस में अफसरों से मिलीभगत करके अपने नाम पर एनओसी लेना चाहते थे।

उन्होंने इस बात की जानकारी इस्टेट ऑफिस तक पहुंचाई। गुरजीत के अनुसार, एक एनओसी बिना उनके नाम के ही इश्यू कर दी गई। इसे 26 मार्च 2006 को इश्यू किया गया और वर्ष 2008 में कैंसल कर दिया गया। अश्वनी कुमार ने दो जनवरी 2009 को नोटिस इश्यू किया।

यह नोटिस एनओसी पर ऑब्जेक्शन सुनने के लिए था। इसके बाद 15 जनवरी 2009 को दस्ती से एनओसी भेज दी गई, जबकि नियम यह है कि एनओसी दस्ती से नहीं भेजी जानी चाहिए। इसके बाद यह मामला वर्ष 2009 में विजिलेंस में गया और तब से यह पेंडिंग है।

प्रापर्टी के एक और मामले में हुई थी गिरफ्तारी
चंडीगढ़ टेरिटोरियल यूथ कांग्रेस के प्रधान विजय पाल सिंह डिंपी कई मामले में फंसे हैं। उन्हें चंडीगढ़ पुलिस ने पंजाब के डीजीपी एसएस विर्क की शिकायत पर गिरफ्तार किया था।

यह मामला भी प्रापर्टी से जुड़ा था। विर्क के अनुसार, वर्ष 2006 में एक प्रापर्टी खरीदने के लिए डिंपी को 50 लाख रुपये एडवांस दिए थे, लेकिन डिंपी ने इसे नहीं लौटाया। डिंपी मुकेश मित्तल से जुड़े मनी लांडरिंग मामले में भी फंसे हैं और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी किए गए कई समन के बाद भी अब तक ईडी के पास नहीं पहुंचे हैं।
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