फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आर्म्स लाइसेंस घोटाले के आरोपी ने कोर्ट में नस काटी

Fri, 01 Nov 2013 07:36 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
बहुचर्चित फर्जी आर्म्स लाइसेंस घोटाले में दलाली करने के आरोपी ने वीरवार को सीबीआई कोर्ट में पेशी के बाद अपने हाथ की नस काट ली। जिस वक्त उसने ब्लेड से नस काटी, उस समय वह बक्शीखाने में था।
विज्ञापन


पुलिसकर्मियों ने सेक्टर-6 स्थित सरकारी अस्पताल में इलाज कराकर उसे वापस अंबाला जेल भेज दिया। बक्शीखाना इंचार्ज की शिकायत पर सेक्टर-5 थाने में उसके खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का भी मामला दर्ज कर लिया गया है।


देहरादून की डिफेंस कालोनी निवासी अनिल माटा (62) जम्मू में बने फर्जी ऑर्म्स लाइसेंस में दलाली करने का आरोपी है। वीरवार को पुलिस इसी केस के सिलसिले में उसे अंबाला जेल से पेशी पर लाई थी।
विज्ञापन


सीबीआई की विशेष अदालत में पेशी के बाद माटा को पुलिस ने बक्शीखाने (कोर्ट में बना लॉकअप) में बंद कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही उसने अपनी दायीं कलाई पर ब्लेड से कट मार लिया। सूत्रों के मुताबिक, अनिल माटा बक्शीखाना व कोर्ट में भी अक्सर ड्रामे करता रहता है।

बेल जंपर है माटा
फर्जी लाइसेंस घोटाले के सभी आरोपी कोर्ट से जमानत पर हैं। अनिल माटा भी जमानत पर था, लेकिन जमानत के दौरान वह कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था और उसने बेल जंप कर दी थी। फिर बाद में माटा को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह अंबाला जेल में ही है।

यह है फर्जी लाइसेंस घोटाला
वर्ष 1990 से 1996 तक जम्मू में सैंकड़ों फर्जी लाइसेंस बने थे। इन्हें बाद में गुड़गांव और फरीदाबाद में रिन्यू कराया गया। ऐसे लोगों के लाइसेंस बने थे, जो कभी जम्मू में रहे भी नहीं। यह घोटाला फरीदाबाद से वर्ष 2001 में पकड़ा गया था। मामले की जांच सीबीआई ने की। फिलहाल यह मामला सीबीआई कोर्ट में चल रहा है और अनिल माटा लाइसेंस बनवाने में दलाली करने का आरोपी है।

बक्शीखाने में दरी के नीचे थी ब्लेड
जिस ब्लेड से अनिल माटा ने अपनी नस काटी थी, वह ब्लेड बक्शीखाने में दरी के नीचे पड़ी थी। बताया जा रहा है कि वह अपने साथ जेल से ही ब्लेड लेकर आया था, जो वहां शेव करने के लिए मिलती हैं।

माटा के पास से एक कागज भी बरामद हुआ, जिसमें लिखा था कि वह जेल में रहकर परेशान हो गया है। आरोपी को पेशी पर लाने से पहले और बक्शीखाने में बंद करने से पहले उसकी पड़ताल क्यों नहीं की गई। यह एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें