सुखना लेक में पिछले चार दिन से मर रहीं बतखों की मौत की वजह भूख और ठंड है। यह खुलासा जालंधर स्थित रीजनल डिजीज डाइग्नोस्टिक लैबोरेटरी में बतखों के भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट से हुआ है। पिछले चार दिन में सुखना लेक पर 16 बतखों ने दम तोड़ा है। शुक्रवार को भी चार और बतखें मरी पाई गईं।
डिपार्टमेंट आफ एनिमल हसबेंड्री के ज्वाइंट डायरेक्टर लवलेश कुमार ने बताया कि शुक्रवार शाम को आठ बतखों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट उन्हें ई-मेल पर मिल गई है। बतखों के मरने की वजह भूख और ठंड है। चंडीगढ़ में दिन और रात के तापमान में काफी अंतर है।
पिछले कुछ दिन में रात का तापमान छह डिग्री तक गिरा है, जबकि दिन के तापमान में इतना बदलाव नहीं है। भूखी बतखें इस बदलाव के अनुरूप खुद को ढाल नहीं पाईं। जब दिन और रात के तापमान में अंतर कम हो जाएगा तो बतखें इससे उबर आएंगी।
नहीं मिला इनफ्लुएंजा
रिपोर्ट में राहत की बात यह है कि बतखों में कोई इनफ्लुएंजा वायरस नहीं मिला है। बतखों के भूखे रहने की वजह यह है कि छोटी मछलियां सर्दी के कारण पानी की निचली सतह पर चली गई हैं। छोटी मछलियां ही इन बतखों का मुख्य भोजन हैं।
सभी बतखों की उम्र एक साल से अधिक
मरी सभी बतखें वयस्क थीं। इनकी उम्र एक साल से ज्यादा थी। एक बतख की औसत आयु पांच से छह साल होती है।
बतखों को कुछ भी मत खिलाइए
पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि लेक पर जो भी आते हैं, वे उन्हें आटे की गोली, पापकोर्न और दूसरे स्नैक्स खिलाते हैं। ये बर्ड्स के लिए बिल्कुल भी मुनासिब नहीं हैं।
विभाग एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
बतखों को बचाने के लिए वाइल्ड लाइफ व एनिमल हसबेंड्री डिपार्टमेंट एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। वाइल्ड लाइफ का कहना है कि बतखों की जिम्मेदारी एनिमल हसबेंड्री की है, जबकि एनिमल डिपार्टमेंट के मुताबिक वे अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। बतखों के सैंपल हमारी ओर से भेजे गए। बीमार बतखों का इलाज हम कर रहे हैं। हर साल बतखों के लिए फीड व मछलियों का भी इंतजाम विभाग की ओर से किया जाता है।
कौवे खा रहे हैं मरी बतखों को
सुखना लेक पर हालत यह है कि बतखों के शव को कौवे नोच कर खाने लगे हैं। वाइल्ड लाइफ के कर्मचारियों के अनुसार उनके पास सिर्फ एक ही बोट है।
जैसे ही किसी बतख के मरने या बीमारी के लक्षण दिखने की सूचना मिलती है, वे उसे लेक से निकालने पहुंच जाते हैं। बोट से स्पॉट तक पहुंचने में 15 मिनट तक लग जाते हैं। इस बीच कई बार कौवे आ जाते हैं।