वारदात के कुछ मिनटों के बाद ही थाने में मौजूद पुलिस मुलाजिमों को पता चला गया और साथ ही घटना थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। वारदात का पता चलते ही पुलिस मुलाजिमों के हाथ पांव फूल गए और तुरंत फ्लिप मसीह को सरकारी गाड़ी से सिविल अस्पताल लाया गया। जहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद मसीह समुदाय के लोगों समेत मृतक के परिवार व रिश्तेदारों को एकत्रित होता देख थाना अजीतवाल, थाना धर्मकोट, थाना कोटइसे खां, चौकी चड़िक, थाना सिटी साउथ समेत पुलिस लाइन से फोर्स बुलाकर थाना सिटी और सिविल अस्पताल में लगा दी गई, ताकि कानून व्यवस्था को बरकरार रखा जा सके। इसके अलावा एसपी एच रतन सिंह बराड़, एसपी डी हरिंदर सिंह परमार समेत चार डीएसपी रैंक के अधिकारी खुद मामले को सुलझाने में जुट गए।
लोक इंसाफ पार्टी के जिला प्रधान ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
घटना के बाद फ्लिप के पारिवारिक सदस्यों ने सिमरजीत बैंस की लोक इंसाफ पार्टी के मोगा के प्रधान जगमोहन सिंह समाध भाई को फोन पर सूचना देकर इंसाफ दिलाने की अपील की। जिसके बाद जगमोहन सिंह अपने साथियों समेत थाना सिटी में शाम के समय पहुंचे। इस दौरान जब पुलिस अधिकारियों के साथ परिवार की समझौते को लेकर बातचीत हो गई तो प्रधान जगमोहन ने इसमें खलल डाल दिया। चूंकि पुलिस मृतक की मां व पत्नी के खाली कागज पर साइन कराना चाहती थी, जिस पर एतराज जाहिर करते हुए प्रधान जगमोहन सिंह ने वहां पर पुलिस के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी।
वहीं जगमोहन सिंह व उसके साथियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत अकाली दल के तीन पार्षद पुलिस ने मसला सुलझाने के लिए सुबह से लगा रखे थे। पार्षदों ने मृतक के रिश्तेदारों को पैसों का लालच देकर मामला रफादफा करने के लिए राजी कर लिया, जबकि फ्लिप की मौत के सदमे में उसकी मां व पत्नी को इस बारे में बिल्कुल भी भनक नहीं थी।
बता दें कि जब लोक इंसाफ पार्टी के सदस्यों ने थाने में पुलिस का विरोध करना शुरू किया तो एसपी के आदेश पर फ्लिप की मां व पत्नी को पुलिस कस्टडी में सीजेएम के पास बयान दर्ज कराने के लिए भेज दिया गया। एसपी का कहना था कि परिवार सीजेएम के पास जो भी बयान दर्ज करवाएगा उस हिसाब से कार्रवाई कर दी जाएगी।
बेटे से मिलाने के लिए संतरी ने मांगे थे एक हजार रुपये
फ्लिप की मां सुनीता का कहना है कि उसके बेटे को थाना सिटी पुलिस 14 नवंबर को फिरोजपुर से गिरफ्तार करके लाई थी। इसके बाद जब 15 नवंबर के दिन उक्त महिला अपने बेटे से मिलने के लिए थाना सिटी में आई तो थाना सिटी में ड्यूटी पर तैनात संतरी प्रवीन कुमार ने कथित तौर उससे एक हजार रुपये रिश्वत की मांग की। पैसे न देने पर संतरी ने उसे उसके बेटे से नहीं मिलने दिया जबकि वह थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह से मिली तो थाना प्रभारी बोले कि अबकी बार तेरे बेटे पर पक्की मोहर लगा देनी आ। जबकि उसके पिछले केसों का हवाला देते हुए महिला से थाना प्रभारी ने दुर्व्यवहार किया।