पंजाब की चुनाव रैलियों में सिरोपे और पगड़ी का क्रेज
चुनावी मौसम में सिरोपे और पगड़ी की धूम न हो, कम से कम पंजाब में तो ऐसी कल्पना नहीं की जा सकती है। इस बार तो कुछ खास की क्रेज देखने को मिल रहा है। दलबदलुओं और रूठों को मनाने की औपचारिक घोषणा के वक्त पंजाब के प्रमुख राजनीतिक दल जहां सिरोपे को ‘सियासी हथियार’ के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं अन्य सूबों व देश की राजधानी से आने वाले शीर्ष नेताओं का स्वागत पगड़ी पहनाकर किया जा रहा है। इन दिनों केसरी रंग के सिरोपे चुनावी अखाड़ों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। सिरोपा भेंट करने का ट्रेंड इतना बढ़ गया है कि प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर के समागमों में पार्टी दलों नेताओं का सिरोपों से स्वागत किया जा रहा है। बडे़ समागमों में तो सैकड़ों मीटर केसरी रंग के कपडे़ की खपत हो रही है।
सिरोपे का महत्व
सिख इतिहास में सिरोपे की महान और गौरवशाली परंपरा है। धार्मिक दृष्टि से इसे गुरू साहिबान का प्रसाद माना जाता है। एसजीपीसी के पूर्व सदस्य ज्ञानी रघुवीर सिंह के मुताबिक केसरी रंग के करीब ढाई मीटर कपडे़ (सिरोपे) को भेंट करते समय बोले सो निहाल सत श्री अकाल का उद्घोष होता है और इसे ग्रहण करने वाला व्यक्ति पूरे सत्कार और मर्यादा के साथ सिर झुका कर इसे स्वीकार करता है।