केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी चंडीगढ़ को ‘नॉन-अटैनमेंट’ शहरों की श्रेणी में रखा है, जिसका अर्थ है कि चंडीगढ़ देश के उन शहरों में है जो केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मानकों को पूरा करने में प्रयासरत है और इसके लिए काफी पैसा खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा शहर के डॉक्टरों का भी यही कहना है कि कोरोना के समय में पटाखे चलाना सेहत के लिए ठीक नहीं है।
प्रशासन ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के एक आदेश का भी हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि वायु प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए जो सख्त कदम उठाए जा सकते हैं, वह उठाने चाहिए। इन दलीलों का हवाला देते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा है कि वह अपने पुराने आदेश पर कायम है और शहर में दिवाली के मौके पर पटाखे चलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध जारी रहेगा।
पटाखा व्यापारियों का एलान, मनाएंगे काली दीवाली
शहर के पटाखा व्यापारियों का कहना है कि वह इस बार काली दीवाली मनाएंगे क्योंकि उन्हें पहले कोरोना की वजह से नुकसान झेलना पड़ा और अब प्रशासन की वजह से झेलना पड़ा है। एसोसिएशन का कहना है कि लॉकडाउन से वह पहले ही बदहाल आर्थिक स्थित में थे। लॉकडाउन के कारण वह कोई और काम भी नहीं कर पाए थे।
अब जब पटाखे बेचने का उन्हें लाइसेंस जारी कर दिया गया तो प्रशासन ने फिर से उन्हें झटका देकर पटाखे बेचने पर ही पाबंदी लगा दोहरी चोट पहुंचाई है। गौरतलब है कि प्रतिबंध हटाने के लिए पटाखा व्यापारियों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली।