हरियाणा गो सेवा आयोग यदि अपने प्रयासों में सफल रहा तो आम लोगों को पैकेट बंद गाय का दूध भी मिल सकेगा।
प्रदेश में गोवंश के सरंक्षण एवं संवर्धन के लिए गठित गो सेवा आयोग ने गोशालाओं से दूध एकत्र कर नए ब्रांड के रूप में बाजार में उतारने का मन बना लिया है। इसके साथ ही आयोग, दवा के रूप में प्रचलित गोमूत्र भी आम लोगों को उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है।
प्रदेश सरकार का सहयोग मिला तो गो सेवा आयोग गोशालाओं से गोबर एकत्र कर उससे उत्पन्न होने वाली मिथेन गैस को सीएनजी में परिवर्तित कर प्रदेशवासियों को सस्ता ईंधन भी उपलब्ध कराने का इच्छुक है। इस संबंध में 18 फरवरी को होने वाली आयोग की बैठक में इन मुद्दों पर ?विचार विमर्श किया जाएगा।
गोसेवा आयोग के अध्यक्ष बीआर मंगला ने बताया कि दरअसल गो सेवा आयोग ने प्रदेश में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का फैसला लिया है और इस दिशा में प्रयास शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गोशालाओं में प्रति दिन एक गाय की देखभाल व आहार पर 40-50 रुपये का खर्च आता है।
पूरे प्रदेश में करीब 400 गोशालाओं में अस समय तीन लाख से अधिक पशु रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने प्रदेश में चार गो अभ्यारण्य बनाने का जिम्मा भी संभाला है और फिलहाल पानीपत में इसके लिए पंचायत से जमीन मिल गई है लेकिन बाकी तीन अभ्यारण्यों की भिवानी, यमुनानगर और जींद में स्थापना के लिए आयोग के पास जमीन के कागजात नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में जल्दी ही संबंधित जिलों के उपायुक्तों से बात करेंगे और पंचायतों से जैसे ही जमीन के कागजात उपलब्ध होंगे, आयोग के नाम ट्रांसफर करते हुए इन अभ्यारण्यों की काम भी शुरू कर दिया जाएगा।
बीआर मंगला ने कहा कि आयोग प्रदेश भर में गोशालाओं के रखरखाव और उनमें पशुओं की देखभाल पर होने वाले खर्च को लेकर सरकार पर बोझ डालने की बजाए अपनी और से भी योगदान देना चाहता है। इसी के मद्देनजर आयोग ने विभिन्न उपक्त्रस्मों पर विचार शुरू किया है। उन्होंने बताया कि पानीपत के गो अभ्यारण्य में बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईआईटी में गोबर गैस से उत्पन्न मिथेन गैस पर शोध जारी हैं।
आयोग बायोगैस के सीएनजी में परिवर्तित कर बेचेगा, जिससे आमदनी का एक मजबूत विकल्प मिल जाएगा। गोशालाओं से दुध एकत्र कर नए ब्रांड के रूप में बेचे जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हालांकि इस काम में करीब एक साल का समय लग सकता है लेकिन इस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग इसके लिए कुछ कंपनियों के साथ पीपीपी मोड पर करार करके एक नया ब्रांड ला सकता है।
गाय का पैकेट बंद दूध और गोमूत्र
प्रदेश में हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट फेडरेशन अपने ब्रांड वीटा के तहत भैंस का पैकेट बंद दूध उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश सरकार ने कुरुक्षेत्र में गो दुग्ध पर आधारित एक प्लांट लगाने का फैसला भी कर लिया है, लेकिन ?अब तक लोगों को गाय का दूध अपने करीबी दूध विक्त्रस्ेताओं से ही मिलता है।
गो सेवा आयोग का ब्रांड बाजार में आने पर लोगों को भैंस के पैकेट बंद दूध के साथ-साथ गाय का पैकेट बंद दूध भी मिलने लगेगा। इसके अलावा, आयुर्वेदिक दवा के रूप में प्रयोग होने वाला गोमूत्र भी आयोग की आमदनी बढ़ाने का विकल्प बनेगा। आयोग ने फैसला किया है कि अभ्यारण्यों की स्थापना के बाद प्रोसेस्ड गोमूत्र को भी बाजार में उतारा जाएगा।