नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान स्थित कामधेनु गोशाला शायद देशभर में पहली ऐसी गौशाला होगी, जिसमें गायों का पुराना वंशज रिकॉर्ड साफ्टवेयर के माध्यम से अपडेट किया जाता होगा।
कोई गाय 20 लीटर दूध देती है, तो उसे क्या बीमारी थी दूध कैसे बढ़ाया गया, आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है, यह सारा रिकार्ड एक क्लिक पर नूरमहल स्थित गोशाला में सामने आ जाता है।
यही वजह है कि केंद्र सरकार दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की गोशाला को देशभर की नंबर वन गोशाला से नवाजा गया है। 1 जून को केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह गोशाला के प्रबंधकों को नई दिल्ली में पुरस्कार देंगे।
नूरमहल की गोशाला में 800 गाय हैं, जिनकी देखभाल के लिए सेवादारों की लंबी चौड़ी संख्या है। सारी गायें देसी नस्ल की हैं, जिसमें साहीवाल, गीर (गुजरात), थारपाकर (राजस्थान नस्ल) व कांकरेज (कच्छ की नस्ल) हैं। इनका पूरा रिकार्ड कंप्यूटराइज है और यहां पर यह प्रयास चल रहा है कि देसी नस्ल की गायों की संख्या को बढ़ाया जाता रहे। इस वजह से गायों का पूरा रिकॉर्ड व डाटा तैयार किया जाता है। गायों की वंशावली पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जाता है।