अकांक्ष मर्डर केस में अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश राजीव गोयल की अदालत में मंगलवार को सजा पर सुनवाई हुई। इस दौरान दोनों पक्ष के वकीलों ने दमदार तरीके से अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों की बहस सुनने के बाद अदालत ने सजा पर फैसला बुधवार के लिए टाल दिया है। पीड़ित पक्ष के वकील ने कोर्ट में अपनी दलील देते हुए कहा कि दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उसे फांसी की सजा मिले या आजीवन कारावास। साथ में भारी भरकम जुर्माना लगाया जाए।
वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने अपनी दलील में कहा कि यह मामला रेयरेस्ट आफ द रेयर में नहीं आता। न ही यह क्राइम सोसाइटी के खिलाफ किया गया है। यह एक व्यक्तिगत अपराध है, इसलिए फांसी की सजा नहीं सुनाई जा सकती। अपराध न तो पैसे, न प्रॉपर्टी और न ही किसी लाभ को प्राप्त करने के लिए किया गया है। यह एक एक्सीडेंट है, जो अचानक हुआ है। मुख्य बात यह है कि हरमेहताब न तो गाड़ी चला रहा था और न ही गाड़ी उसके नियंत्रण में थी। इस दौरान उन्होंने अदालत में उच्च न्यायालय की तीन जजमेंट भी पेश कीं। इनमें साल 1980 का बच्चन सिंह बनाम स्टेट आफ पंजाब, 1983 का माच्छी सिंह बनाम स्टेट आफ पंजाब और 2018 की चुन्नू लाल वर्मा बनाम स्टेट आफ छत्तीसगढ़ की जजमेंट शामिल थी।
हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री के भतीजे अकांक्ष की हत्या फरवरी 2017 में सेक्टर नौ में बीएमडल्ब्यूए कार से कुचलकर कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में दो को मुख्य आरोपी बनाया था। इसमें शामिल हरमेहताब को सोमवार को दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि दूसरा आरोपी बलराज रंधावा पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। अदालत उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी है। उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित है।