वह पढ़ना चाहता था लेकिन बदकिस्मती यह थी कि वह गरीब परिवार से था। एक माह स्कूल की फीस नहीं दे पाया। फिर गर्मी की छुट्टियां हो गईं। स्कूल फिर से खुला तो क्लास इंचार्ज ने दो माह की फीस 80 रुपये जमा कराने के लिए कहा।
माता-पिता फीस के पैसे नहीं दे पा रहे थे। उसे स्कूल छूटने का डर सताने लगा। तनाव मासूम पर बुरी तरह हावी हुआ और आखिरकार फीस के आगे जिंदगी सस्ती हो गई। उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
यह कहानी है पंजाब के गुरदासपुर के नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले रमनदीप की। रमनदीप को अगर आर्थिक मदद मिल जाती तो आज वह भी अन्य सहपाठियों के साथ कक्षा में सुनहरे भविष्य की बुनियाद तैयार कर रहा होता।