सरकारी संस्थानों में पब्लिक फंड का कितना दुरुपयोग होता है, इसकी एक मिसाल पीजीआई कामनोचिकित्साविभाग है। दो साल पहले डिपार्टमेंट ने मरीजों के लिए उपयोगी 48 हजार पाउ़ंड (करीब सैंतालीस लाख रुपये)की एक मशीन खरीदी थी, लेकिन आज तक उसे इंस्टाल नहीं किया जा सका है।
दो साल से मशीन स्टोर में पड़ी हुई है। यह मशीन उन मरीजों के लिए लाभदायक है, जिनमें अवसाद संबंधी बीमारियां दूर करने में मेडिटेशन व दवाइयां कारगर नहीं होतीं।
पीजीआई की ओर से दलील दी गई है कि मशीन के लिए जगह नहीं मिल पा रही थी। अब जगह मिल चुकी है, जल्द ही इसे इंस्टाल कर दिया जाएगा। देश में ऐसे बहुत कम सेंटर हैं, जहां पर यह मशीन है।
जानकारी के मुताबिक दो साल पहले डिपार्टमेंट ने ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (टीएमएस) मशीन खरीद ली थी, लेकिन तय नहीं कर पाए कि इसे लगाना कहां है? यह मशीन न्यू ओपीडी में ही लगनी है। सूत्रों ने बताया कि यह मशीन अब न्यू ओपीडी के द्वितीय तल में स्थापित होने जा रही है।
क्या फायदे हैं इन मशीन के
यह मशीन अवसाद ग्रस्त मरीजों के लिए काफी उपयोगी साबित होती है। खासतौर पर डिप्रेशन, उत्कंठा, न्यूरो से संबंधित दर्द, सीजोफ्रेनिया से संबंधित रोगों में राहत का काम करती है। मशीन से ब्रेन स्ट्रोक, मल्टीपल स्केलेरोसिस से होने वाले नुकसान का मूल्यांकन करती है। इसके अलावा भी मशीन के कई अन्य फायदे हैं, जो मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
कितनी उपयोगी है मशीन
पीजीआई का मनोचिकित्साविभाग इस रीजन के मरीजों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यहां पर पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल और जम्मू कश्मीर तक के मरीज आते हैं। इसमें सबसे ज्यादा मरीज डिप्रेशन के होते हैं। पिछले साल कुल 45 हजार से ज्यादा मरीज डिपार्टमेंट में आए थे। इसमें अधिकतर मरीज अवसाद से ग्रसित थे। यदि यह मशीन स्थापित हो जाती तो मरीजों को काफी फायदा मिलता।