रिश्वत मिलने के बाद टेंडर की फाइल से हटाई गईं आपत्तियां
सूत्रों ने बताया कि 21 सितंबर 2022 को कांट्रेक्टर को सूचना मिली कि उनके मामले में 6 माह की जगह टेंडर की मात्र तीन माह की स्वीकृति दी गई है और उन्होंने इस बारे में विजय नामा को अवगत करवाते हुए नाराजगी व्यक्त की। इसके तुरंत बाद टेंडर को छह माह के लिए स्वीकृति दी गई। बताया गया कि पहले अधिकारी कुशवाहा ने फाइल पर कुछ आपत्तियां लगा दी थी लेकिन बाद में दोबारा फाइल मंगवाकर उन आपत्तियों को हटाया गया। इनके द्वारा कोडवर्ड में बातचीत की गई जिसमें बताया गया कि मामला 365 को मंजूरी दे दी गई है और उन्हें पार्टी से अवैध कापियां एकत्र करने का निर्देश दिया है यानि यूनिट की फाइल को अप्रूव करके कांट्रेक्टर से बचे हुए रिश्वत के पैसे लेने के लिए कहा गया। कांट्रेक्टर की ओर से तीन किस्तों में सेना अधिकारी संदीप सिंह राजपूत और देव कुमार वर्मा के खातों में 49500 रुपये रिश्वत के ट्रांसफर किए गए थे। इस मामले में सीबीआई ने 7, 7ए, 8, 12 और 120बी के तहत 21 जून, 2023 को गुप्त सूचना के आधार पर मामला दर्ज किया था।
कोर्ट में चार्जशीट हो चुकी दायर
इस मामले में सीबीआई कुछ महीने पहले ही भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के एकीकृत वित्तीय सलाहकार अधिकारी उमा शंकर प्रसाद कुशवाहा, जूनियर ट्रांसलेटर विजय नामा, सेना अधिकारी संदीप राजपूत और देव कुमार शर्मा, राजस्थान के जयपुर में तनुश्री सर्विसेज चलाने वाले राजेंद्र सिंह और चंडीगढ़ में सीसीटीवी कैमरे और मेटल डिटेक्टर समेत सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने वाले जेएस बेदी के खिलाफ चार्जशीट भी दायर हो चुकी है। इसी मामले में अब सेना अधिकारी संदीप सिंह राजपूत और देव कुमार वर्मा के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी मिली है। सीबीआई द्वारा मामले में अब ब्रिगेडियर कमांडेंट आशीष भारद्वाज, लेफ्टिनेंट कर्नल मार्कंडेय, बिग्रेडियर राजीव चौहान, लेफ्टिनेंट कर्नल रिजितवन रे (स्वीकृति प्राधिकारी) और सहायक निदेशक एवं वैज्ञानिक-सीआरबी भोसले को गवाह बनाने का आवेदन किया था जिसे कोर्ट ने भी मंजूरी दे दी है।