चंडीगढ़। नगर निगम ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1864.92 करोड़ रुपये का बजट पास किया है, लेकिन इस बार भी निगम के पास विकास कार्यों के लिए पैसे नहीं हैं। निगम ने पानी के बिल से 160 करोड़, संपत्ति कर से 66 करोड़ और गारबेज सेस से राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है, जबकि सड़कों की मरम्मत, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और डॉग बाइट पीड़ितों के मुआवजे के लिए इस वर्ष दो करोड़ रुपये रखे गए हैं।
मेयर हरप्रीत कौर बबला की अध्यक्षता में हुई नगर निगम की सदन की पहली बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1864.92 करोड़ का बजट पास हुआ। कई नए प्रोजेक्ट्स को इसमें शामिल किया गया है। बजट में कुल 1704.62 करोड़ की ग्रांट-इन-एड को मंजूर किया गया है, जिसकी मांग प्रशासन से चौथे दिल्ली फाइनेंस कमीशन के रिपोर्ट के अनुसार की गई है। निगम ने अपने विभिन्न स्रोतों से कुल करीब 410 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य रखा है। निगम का कुल बजट करीब 2114.71 करोड़ रुपये बनता है लेकिन वित्तीय वर्ष की शुरू होने के साथ ही नगर निगम 249.79 करोड़ के घाटे में है। ऐसे में अगले साल का बजट 1864.92 करोड़ रह जाता है। 24 घंटे पानी की परियोजना के लिए बजट में 55 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। पिछली बार 52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन खर्च 46 करोड़ 40 लाख रुपये ही हुए थे।
इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के तौर पर प्रशासन से 9 लाख रुपये मांगे
निगम ने इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के तौर पर प्रशासन से 9 लाख रुपये मांगे हैं। पिछली बार 40 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन एक भी रुपया नहीं मिला था। इसलिए अब मांगा की कम गया है।
वेतन-भत्ते देने में भी खर्च हो जाएंगे सारे पैसे
अगले साल होने वाले खर्चों के लिए नगर निगम ने कुल 1664.75 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें से 1197 करोड़ रुपये कर्मचारियों को वेतन, भत्ते, पेंशन न अन्य देने में खर्च हो जाएंगे, जबकि 467.75 करोड़ रुपये कैपिटल हेड में खर्च करने के लिए रखे हैं। हालांकि निगम को प्रशासन से 625 करोड़ रुपये मिलेंगे और अपने विभिन्न स्त्रोतों से 410 करोड़ कमाने का लक्ष्य रखा है। वास्तव में इससे कम ही निगम कमा पाएगा। जबकि निगम का हर महीने का अनिवार्य खर्च ही करीब अब 80 से 82 करोड़ रुपये है। निगम के पास पूरे साल में जितने पैसे आएंगे, वो कर्मचारियों को वेतन देने में ही खर्च हो जाएंगे। ऐसे में विकास कार्य इस साल भी अटकेंगे। पिछले करीब एक साल से सारे काम अटके हुए हैं।