इस साल पार्किंग के रेट ही नहीं, बल्कि शहरवासियों पर अन्य बोझ भी पड़ने की पूरी संभावना है। मंगलवार को होने वाली सदन की बैठक में पेड पार्किंग के रेट बढ़ने का ही नहीं, बल्कि यह प्रस्ताव चर्चा के लिए आ रहा है कि नगर निगम किस तरह से अपने आय के साधन बढ़ा सकती है।
सोमवार रात पार्षदों को यह प्रस्ताव भेजे गए हैं, जिसमें पड़ोसी राज्यों के नगर निगम के आय के स्रोत बताए गए हैं जो कि चंडीगढ़ नगर निगम में नहीं हैं और नगर निगम यह टैक्स लगा सकता है। शिमला नगर निगम के एंट्री और ग्रीन टैक्स का भी जिक्र किया गया है। इस प्रस्ताव में यह भी बताया गया है कि प्रशासन नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन का रोड टैक्स खुद रखता है, जबकि नगर निगम को प्रशासन से इस पर भी शेयर मांगना चाहिए।
मालूम हो कि इस समय भाजपा पूर्ण रूप से सता में है और नए टैक्स लगाने का विरोध भी उन्हें ज्यादा सदन में कांग्रेस का नहीं सहना पड़ेगा। क्योंकि कांग्रेस के मात्र 4 ही पार्षद इस समय है और जो प्रशासन की ओर से 9 मनोनीत पार्षद नियुक्त किए गए हैं वह भी भाजपा को ही समर्थन कर रहे हैं। अधिकारियों ने मेयर सहित पार्षदों पर पानी का रेट बढ़ाने का भी दबाव बनाया हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि हर साल पानी की सप्लाई से 60 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है ऐसे में आने वाले दिनों में पानी का रेट बढ़ाने का प्रस्ताव भी चर्चा के लिए आ सकता है।