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चंडीगढ़: निगम ने एक माह के कचरे का शुल्क 3750 रुपये भेजा

Sun, 04 Jul 2021 02:03 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

शहरवासियों का कहना है कि उनके क्षेत्र में कचरा उठाने वाली निगम की गाड़ी आधे माह ही आई लेकिन शुल्क पूरे माह का भेजा गया है। इससे पहले लोगों ने रेहड़ी वालों को भी रुपये दे दिए। लोगों ने बताया कि पिछले 20 सालों से जो रेहड़ी वाले कचरा लेते थे, वह कम से कम ऊपर की मंजिल तक आकर कचरा ले जाते थे।
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चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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नगर निगम की ओर से शहरवासियों को पानी के बिल के साथ भारी भरकम कचरा शुल्क भेज दिया गया है। इससे लोग परेशान हो उठे हैं। लोग अब यह गुणा-भाग लगा रहे हैं कि आखिर एक महीने का कचरे का शुल्क ढाई से तीन हजार कैसे हो सकता है।

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अब लोग इस संबंध में नगर निगम में शिकायत दे रहे हैं। उधर, निगम अधिकारियों का कहना है कि पहली बार पानी के साथ कचरे का शुल्क भेजा गया है। ऐसे में दिक्कतें आ सकती हैं। समस्याओं के समाधान के लिए एक कमेटी बना दी गई है।

शहरवासियों का कहना है कि उनके क्षेत्र में कचरा उठाने वाली निगम की गाड़ी आधे माह ही आई लेकिन शुल्क पूरे माह का भेजा गया है। इससे पहले लोगों ने रेहड़ी वालों को भी रुपये दे दिए। लोगों ने बताया कि पिछले 20 सालों से जो रेहड़ी वाले कचरा लेते थे, वह कम से कम ऊपर की मंजिल तक आकर कचरा ले जाते थे। अब तो गाड़ी आती है और नीचे से ही निकल जाती है। शहर को स्मार्ट बनाने की योजना तो ठीक है लेकिन उसे सही तरह से धरातल पर नहीं लाया गया है।

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तय शुल्क (प्रति किचन)
  • 2 मरले से कम का मकान - 50 रुपये
  • 2 से 10 मरले तक - 100 रुपये
  • 10 मरले से 1 कनाल तक - 200 रुपये
  • 1 कनाल से 2 कनाल तक - 250 रुपये
  • 2 कनाल से ज्यादा- 350 रुपये
  • स्ट्रीट वेंडर- 50 रुपये
  • ढाबा, मिठाई या कॉफी की दुकान (एससीओ/एससीएफ के अनुसार) - 200 से 800 रुपये
  • गेस्ट हाउस, धर्मशाला, भवन, होटल, 50 लोगों तक खाना खाने वाला स्थान- 2 हजार रुपये
  • 50 लोगों से ज्यादा खाना खाने वाला स्थान, 3 स्टार होटल- 3 हजार रुपये
  • 3 स्टार से ज्यादा वाला होटल- 5 हजार रुपये
  • व्यावसायिक ऑफिस, शैक्षणिक संस्थान, बैंक- 2 हजार रुपये
  • अस्पताल, क्लीनिक व लैब 50 बेड तक (नॉन बायोमेडिकल वेस्ट)- 1000 रुपये
  • अस्पताल, क्लीनिक व लैब 50 बेड से ज्यादा (नॉन बायोमेडिकल वेस्ट)- 2000 रुपये
  • छोटी इंडस्ट्री (हानिकारक कचरा न निकलता हो)- 1000 रुपये
  • गोदाम, कोल्ड स्टोर- 2 हजार रुपये
  • सामुदायिक केंद्र व शादी वाले स्थल- 1 हजार रुपये प्रति आयोजन
  • क्लब, सिनेमा हॉल, पब- 5 हजार रुपये
  • अन्य गतिविधियां- 1000 रुपये
ग्रामीण क्षेत्रों में शुल्क
  • 5 मरला से कम- 50 रुपये
  • किराएदार है तो 50 रुपये प्रति मंजिल
  • 5 मरले से एक मरले तक - 100 रुपये प्रति मंजिल
  • 1 कनाल से ज्यादा- 200 रुपये प्रति मंजिल
  • सामान्य दुकानों से- 100 रुपये
  • खाने पीने की दुकानों से - 200 रुपये
इन सेक्टरों में गया पहला बिल
सेक्टर 1, 2, 3, 4, 5, 7, 8, 21, 22, 18, 19, 20, 23, 26, 29, 34, 35, 38, 46, 47 धनास में निगम ने पानी के साथ कचरा शुल्क भेजा है।

समस्या है तो यहां करें संपर्क
8837765807- जगजीत सिंह- सफाई निरीक्षक
406080- निगम हेल्पलाइन
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पहले प्रतिदिन 60 समस्याएं आ रहीं थीं, अब 35

निगम के पास शुरुआत में प्रतिदिन 50 से 60 समस्याएं आती थीं। अब प्रतिदिन 30 से 35 समस्याएं रह गई हैं। ज्यादातर लोगों मेें असमंजस की स्थिति थी। इसके अलावा लोगों का कहना है कि कचरे वाले बिना बताए चले जाते हैं, हमने कचरा नहीं दिया तो शुल्क क्यों दें। लोगों को व्यवस्था के बारे में बताया तो उन्हें सहूलियत हुई है।

केस एक: सेक्टर-19 निवासी हरवंश लाल को नगर निगम ने दो माह का पानी और सीवर का बिल 961 रुपये भेजा है। साथ में मई माह के कचरे का शुल्क 3750 रुपये आया है। बिल में 708 रुपये पानी का शुल्क, 40 रुपये मेंटेनेंस चार्ज और 213 रुपये सीवर का शुल्क लगाया गया है।

हरवंश लाल ने बताया कि उनका मकान 600 गज में हैं। जिसमें 3 किचन हैं। तीनों किचन के कचरे का फरवरी 2021 तक का शुल्क 200 रुपये के हिसाब से रेहड़ी वाले को दिया जा चुका है।

वहीं, 11 मई को निगम की ओर आई कचरा उठाने वाली गाड़ी के चालक को 250 रुपये के हिसाब से तीन घरों का 750 रुपये भुगतान भी कर दिया था। इसके बावजूद उन्हें 3750 रुपये कचरे का शुल्क भेजा गया है।

केस 2: सेक्टर-18 निवासी केशव चंद्रा ने बताया कि उनका पानी का बिल 2682 रुपये जबकि कचरे का एक माह का शुल्क 2625 रुपये आया है। केशव ने बताया कि अप्रैल तक तो निगम ने सेक्टर में गाड़ी भेजी ही नहीं। रेहड़ी वाला ही हमारे यहां से कचरा लेकर जाता था।

निगम के अनुसार 10 मरला से 1 कनाल तक प्रति रसोई 200 रुपये कचरा शुल्क लेना था। मई माह में आधे महीने रेहड़ी वाले ने कचरा लिया तो आधा शुल्क उसे दे दिया। ऐसे में निगम की ओर से सिर्फ 100 रुपये ही शुल्क बनता था। यह शुल्क किस हिसाब से भेजा गया है, समझ नहीं आ रहा है। निगम को लिखित शिकायत दे दी है।

क्या कहते हैं अधिकारी
लोगों की समस्या के निस्तारण के लिए कमेटी बनाई गई है। कमेटी के पास जो समस्या आती है, उसे 24 घंटे के अंदर निस्तारित किया जा रहा है। लोगों को थोड़ा असमंजस है, जो अगली बार नहीं रहेगा। - डॉ. एपी सिंह, एमओएच
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