चंडीगढ़। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बुधवार को नगर निगम और जेपी प्लांट विवाद में फैसला सुनाते हुए कहा कि अब नगर निगम कंपनी को टिपिंग फीस नहीं देगा। इसके साथ कहा कि जेपी प्लांट के अधिकारी एक माह में तय करें कि वह प्लांट को संचालित कर सकते हैं अथवा नहीं। यदि कंपनी प्लांट में कचरा प्रोसेस करने में सक्षम नहीं है तो प्लांट को निगम को सौंपने के बारे में भी फैसला जल्द करे।
डड्डूमाजरा स्थित जेपी प्लांट में कचरे को निस्तारण के लिए नगर निगम और प्लांट के अधिकारियों में काफी दिनों से विवाद चल रहा है। प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कचरा प्रोसेस करने के लिए टिपिंग फीस दी जाए, वहीं निगम के अधिकारियों का कहना है कि कंपनी से ऐसा कुछ भी तय नहीं हुआ है। मामला दिल्ली एनजीटी में पहुंचा। कई बार सुनवाई केबाद बुधवार को एनजीटी ने फैसला सुनाया कि नगर निगम कंपनी को कोई टिपिंग फीस नहीं देगा। वहीं, कंपनी के अधिकारी प्लांट को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। यदि वह प्लांट का संचालन कर सकते हैं तो कचरा प्रोसेस करें, नहीं तो निगम के साथ सामंजस्य बनाकर आगे की योजना तैयार करें। ज्ञात हो कि सात फरवरी को भी निगम के अधिकारियों के साथ कंपनी ने बैठक की थी। उस समय कंपनी के अधिकारियों ने साफ मना कर दिया था कि प्लांट को निगम को नहीं दिया जाएगा। हमें टिपिंग फीस दी जाए, हम ही प्लांट का संचालन करेंगे।
प्लांट से अतिरिक्त कचरा उठाने के लिए निगम को निर्देश
कुछ माह पहले नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने प्लांट से शहर का पूरा कचरा प्रोसेस करने को कहा था। उन्होंने कचरे के सभी ट्रक डंपिंग ग्राउंड पर भेजने की बजाय प्लांट में ही भेजना शुरू कर दिया। प्लांट में इतना कचरा प्रोसेस नहीं हो सका और अंबार लग गया। इस कारण ट्रकों की कतार भी प्लांट के बाहर लगने लगी। नवंबर महीने में सुनवाई के दौरान एनजीटी ने निगम को ही कचरा उठाने के लिए कह दिया। अब स्मार्ट सिटी के तहत हो रही लीगेसी माइनिंग के बजट में बढ़ोतरी करते हुए लगभग 25 से 30 टन कचरा प्रोसेस निगम को ही कराना पड़ रहा है।