चंडीगढ़। शहर से निकलने वाले कचरे का निस्तारण कर छह मेगावाट के बिजली प्लांट से नगर निगम हर माह लगभग 3 करोड़ 20 लाख रुपये की बिजली उत्पादित कर सकता है। साथ ही प्लांट से निकलने वाले आरडीएफ से ईंट और टाइल्स बनाने का काम भी किया जा सकता है। हाल ही में दिल्ली स्टडी टूर से लौटे पार्षदों के समूह ने मेयर को यह सुझाव दिया है।
मेयर रविकातं शर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले 8 पार्षदों का समूह अधिकारियों के साथ दिल्ली स्थित दो प्लांटों की स्टडी टूर पर गया था। वहां कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट का निरीक्षण किया गया। वहां एक प्लांट 24 मेगावाट तो दूसरा प्लांट 23 मेगावाट बिजली बना रहा है। दिल्ली में कचरे की मात्रा भी चंडीगढ़ से काफी ज्यादा है। हालांकि कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि कचरा जितना अच्छा ज्वलनशील होगा, उतनी ही ज्यादा बिजली बनेगी। प्लांट में गीले कचरे से खाद बनाया जाता है और सूखे कचरे से बिजली बनती है।
घर से कचरा उठाने से लेकर निस्तारित तक पूरा काम
दल ने पहले भवाना स्थित प्लांट में निरीक्षण किया। वहां हैदराबाद की रामकी कंपनी प्रतिदिन 2700 एमजीडी कचरा निस्तारित करती है। यह चंडीगढ़ से छह गुना ज्यादा कचरा है। इससे वहां 24 मेगावाट बिजली पैदा होती है। इसके लिए सरकार से टिपिंग फीस ली जाती है। प्लांट में 2200 से 2500 टन कचरा प्रतिदिन निस्तारित हो जाता है। इससे कंपनी प्रतिदिन लगभग 38 लाख और हर माह 11 करोड़ की बिजली बना लेती है। कंपनी घरों से कचरा लेने से लेकर निस्तारित करने का पूरा काम करती है। साथ ही 7 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली बेचती है।
केवल कचरा निस्तारण, निगम लेता है घरों से कचरा
वहीं, ओखला के तिमारपुर स्थित प्लांट में जिंदल समूह कचरा निस्तारित करता है। यहां प्रतिदिन 2100 टन कचरा निस्तारित होता है, जिससे 23 मेगावाट बिजली बनती है। निगम घरों से कचरा लेकर प्लांट तक पहुंचाता है। वहां कचरे को निस्तारित कर हर माह लगभग 11 करोड़ रुपये का बिजली उत्पादन होता है।
चंडीगढ़ में रोजाना 450 टन कचरा निकलता है
वहीं, चंडीगढ़ में प्रतिदिन 450 टन कचरा घरों से निकलता है। 75 टन कचरे से एक मेगावाट बिजली बनती है। इस हिसाब से 6 मेगावाट का प्लांट लगाने पर प्रतिदिन लगभग 10 लाख की बिजली बन सकती है। इस हिसाब से हर माह 3 करोड़ 2 लाख की बिजली बन सकती है। अभी प्लांट पर निगम हर माह 5 से 6 करोड़ रुपये खर्च कर देता है।