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कैप्टन के बाद जाखड़ ने भी सिद्धू को किया अलग-थलग, कमेटियों में नहीं लिया, विरोधियों को तरजीह

Thu, 07 May 2020 04:10 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमृतसर
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Navjot Singh Sidhu - फोटो : twitter
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ की ओर से प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए गठित जिला स्तरीय कमेटियों में पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू को शामिल नहीं किया गया है। जाखड़ द्वारा गठित इस कमेटी में सांसद गुरजीत औजला के साथ-साथ शहर के सभी अन्य तीन विधायकों डॉ. राज कुमार, सुनील दत्ती, इंदरबीर सिंह बुलारिया को शामिल किया गया है।
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कैप्टन ने इस कमेटी में नवजोत सिद्धू के राजनीतिक विरोधी रहे नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन दिनेश बस्सी, सिद्धू की कार्यप्रणाली के आलोचक रहे मेयर कर्मजीत सिंह रिंटू शहरी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जतिंदर सोनिया व देहात कमेटी के अध्यक्ष भगवंत सच्चर को शामिल किया है।

कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अमृतसर के सभी विधायकों व मंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस कर कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के इलाज के बारे में बातचीत की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय से इस वीडियो कांफ्रेंस में शामिल होने की मिली जानकारी की अनदेखी अनदेखी कर इसमें शामिल नहीं हुए थे।
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सिद्धू की संभावित नई भूमिका पर राजनितिक पंडितों की निगाहें

कैप्टन के साथ पैदा हुए राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सुनील जाखड़ के सिद्धू के साथ बेहतर संबंध थे। बीते एक वर्ष से प्रदेश की राजनीती से अलग-थलग पड़े नवजोत सिद्धू को जिला स्तरीय कमेटी में शामिल न कर जाखड़ ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि प्रदेश में मुख्यमंत्री के साथ सहयोग करने वाले विधायक व सांसद ही सरकारी कार्यों में आगे बढ़ाएंगे।

सिद्धू द्वारा स्थापित किए गए यू ट्यूब चैनल ‘जित्तेगा पंजाब’ के माध्यम से जारी की गई पहली कुछ वीडियो में सिद्धू ने कैप्टन की कार्यप्रणाली को न केवल चुनौती दी, बल्कि आगामी विधान सभा चुनाव में कैप्टन के साथ दो-दो हाथ करने के भी संकेत दिए हैं। सिद्धू को जिला स्तरीय कमेटी में शामिल न कर जाखड़ ने सिद्धू को प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति से अलग कर दिया है।

कांग्रेस के कैप्टन गुट को लगता है सिद्धू ‘जित्तेगा पंजाब’ के नाम पर प्रदेश की राजनीती में एक अलग धड़ा स्थापित करने के जुगाड़ में है। कोरोना वायरस के खत्म होने के बाद पंजाब की कांग्रेस पार्टी की सियासत में सिद्धू की संभावित नई भूमिका पर राजनितिक पंडितों की निगाहें जम गई हैं।
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