चंडीगढ़ प्रशासन की लापरवाही, कहीं उत्तर प्रदेश और बिहार प्रशासन के लिए भारी न पड़ जाए। क्योंकि जिन दो हजार से ज्यादा मजदूरों को स्क्रीनिंग के बाद चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर लाया गया है, उन्हें परोसा जाने वाला भोजन यूटी गेस्ट हाउस से लाने की जिम्मेदारी वहां के मुलाजिमों को दी गई है। यह मुलाजिम फटे हुए ग्लव्ज और नंगे हाथों से खाने का पैकेट रेलवे स्टेशन तक पहुंचा रहे हैं। अगर कोरोना संक्रमण श्रमिकों तक पहुंचा तो दो राज्य तबाह हो सकते हैं।
यहां कुछ भी नहीं हैंड फ्री
ट्रेन चलने से तीन-चार घंटे पहले आधे श्रमिकों को मई की गर्मी में कोचों में लाकर बैठा दिया जा रहा है। महज एक बोतल पानी के भरोसे। ट्रेन में बैठने के एक दो घंटे बाद ही अधिकतर यात्रियों की पानी की बोतल खाली हो जाती है। ऐसे में रेलवे स्टेशन पर और ट्रेन के अंदर एक ही नलके पर दर्जनों मजदूर पानी भरने के लिए खड़े हो जाते हैं।
एक टूटी को पानी भरने के लिए बारी-बारी से कई लोग छूते हैं, ऐसे में एक से दूसरे को संक्रमण फैल सकता है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हैंड फ्री नलका लगाने के लिए कहा था, लेकिन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर इस दिशा में अब तक काम भी शुरू नहीं हुआ है।