लॉकडाउन में रक्षा मंत्रालय विभिन्न तरीकों से अपने पूर्व सैनिकों का भी ध्यान रखे हुए है। इसी कड़ी में अपनी दवाइयों के लिए पूर्व सैनिकों को अब पॉलीक्लीनिकों में धक्के खाने की जरूरत नहीं है। वे अपनी दवाई बाहर से खरीद सकते हैं। सेना इसके लिए उन्हें रीइंबर्स करेगी। रक्षा मंत्रालय की ओर से विशेष स्वीकृति दी गई है। मंत्रालय के अधीनस्थ एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम(ईसीएचएस) की सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन ने सभी क्षेत्रीय केंद्रों को इस बाबत निर्देश भेज दिए हैं।
अधिकतर पूर्व सैनिक इलाज के लिए ईसीएचएस की पॉलीक्लीनिकों, सर्विस अस्पतालों और इंपैनल्ड अस्पतालों से जुड़े रहते हैं। कई गंभीर और लंबी चलने वाली बीमारियों के दौरान पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की दवाइयां भी लंबी चलती हैं। यह दवाइयां पॉलीक्लीनिकों और अस्पतालों में भी उपलब्ध रहती हैं। महामारी में अस्पतालों में ज्यादा भीड़ न हो इसके लिए ईसीएचएस सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन ने एक पूर्व सैनिकों के लिए एक खास व्यवस्था की है।
इसके अंतर्गत यदि लॉकडाउन पीरियड 3 मई से अधिक बढ़ता है, तो पूर्व सैनिक अपनी गंभीर बीमारी संबंधी दवा और लंबी चलने वाली अन्य लाइफ सेविंग दवाएं बाहर केमिस्ट से खरीद सकते हैं। इसके लिए पूर्व सैनिकों को पॉलीक्लिनिकों में आने की जरूरत नहीं है। पूर्व सैनिक 31 मई तक बाहर केमिस्ट से दवाई खरीद सकते हैं। सेना इसके लिए उनके दवा बिल का रीइंबर्स करेगी। बशर्ते संबंधित दवा की प्रिसक्त्रिस्प्शन पालीक्लीनिक सर्विस हस्पताल और इंपैनल्ड अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा की होनी चाहिए।
15 जून तक पूर्व सैनिकों को संबंधित दवा बिलों को रीइंबर्समेंट के लिए जमा करवाना। सेना के एक आला अधिकारी के अनुसार इसी व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि पूर्व सैनिकों को अपनी रेगुलर चलने वाली दवाओं को जारी रखने में दिक्कत न हो और वह लॉकडाउन में दवाई के लिए ज्यादा परेशान न हो।