एलटीसी और डीए में कटौती करने के बाद हरियाणा सरकार कर्मचारियों के अन्य भत्ते काटने की भी तैयारी कर रही है। सरकार ने इस बारे में स्पष्ट संकेत भी दिए हैं। दरअसल, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री के साथ मंगलवार को मीटिंग की थी। इसमें संघ सदस्यों ने अनेक सुझाव दिए।
संघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि सुझाव दिए जाने के बावजूद सरकार ने कर्मचारियों के अन्य भत्तों में कटौती करने के संकेत दिए हैं। जिसे कर्मचारी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकते। एक ही मजदूर संगठन को मीटिंग में आमंत्रित करने व बाकी ट्रेड यूनियन की अनदेखी करने के एतराज पर सीएम ने कहा कि शीघ्र सभी मजदूर संगठनों को बुलाकर बातचीत की जाएगी।
मीटिंग में संघ ने दो टूक कहा कि सरकार कर्मचारियों के भत्तों में कटौती करने की बजाए बड़े पूंजीपतियों पर ज्यादा टैक्स लगाकर आवश्यक संसाधन जुटाने का काम करे। केंद्र सरकार से जीएसटी का राज्य का हिस्सा लिया जाए। पीएम केयर्स फंड से फंड लेकर आर्थिक संकट दूर कर सकते हैं। संघ नेताओं ने मुख्यमंत्री को पुरानी पेंशन बहाल कर एनपीएस के करोड़ों रुपए सरकार के खजाने में जमा करने को कहा।
ठेकेदारों को बीच से हटाकर ठेका कर्मचारियों को सीधा विभागों के पे रोल पर लेकर ठेकेदारों को दिया जाने वाला जीएसटी व सर्विस टैक्स का करोड़ों रुपए बचाने का भी सुझाव दिया। जिस पर सरकार ने गंभीरता से गौर करने का आश्वासन दिया है। सरकार के आदेश के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है।
ये भी दिए सुझाव
सभी विभागों के रेगुलर व ठेका कर्मचारियों के तीन से चार महीने से वेतन का भुगतान करें, जीपीएफ निकलने पर लगाई गई रोक को हटाएं, सुप्रीम कोर्ट से हार चुके 1983 पीटीआई व आईटीआई के अनुबंध अनुदेशकों को सेवा सुरक्षा प्रदान करें, हरियाणा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक कर्मचारियों को जुलाई 2019 से रोका गया मंहगाई भत्ता दें, आशा वर्करों के मानदेय को बढ़ाकर 8 हजार रुपये करें, सभी सफाई कर्मचारियों को 4 हजार रुपये जोखिम भता दिया जाए।