हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना का ग्राफ बढ़ने की बजाए स्थिर हुआ है और अब यह नीचे गिरने वाला है। इसका इंतजार कर रहे हैं। सरकार का पूरा प्रयास है कि कोरोना आगे नहीं फैले। 20 अप्रैल तक लॉकडाउन में पूरी सख्ती बरती जाएगी। इसके बाद ही ढील पर विचार होगा। सीएम मनोहर लाल हरियाणा आज कार्यक्रम में प्रदेश वासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कष्ट के दिन कम रह गए हैं। अंधेरा हटने वाला है और सवेरा होने वाला है। सोशल डिस्टेंसिंग से स्वयं की मदद करें। इससे कोरोना से बचा जा सकता है।
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सीएम ने गीता के श्लोक का उच्चारण कर कहा कि संकट के समय कार्य करें, फल के पीछे न भागें। देश इस समय विशेष प्रकार के संकट से जूझ रहा है।20 अप्रैल तक सभी राज्यों में कोरोना की वर्तमान स्थिति का आंकलन किया जाएगा और जहां-जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या का ग्राफ स्थिर होगा, नए मामले नहीं आएंगे, वहां कुछ शर्तों के साथ औद्योगिक व आर्थिक गतिविधियां शुरू हो सकेंगी। इसलिए प्रदेश सरकार हरियाणा में कोरोना ग्राफ को स्थिर रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
उन्हें उम्मीद है कि चरणबद्ध तरीके से आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां शुरू कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की इस अवधि को भी संकल्प व धैर्य के साथ पूरा करना है और अंत में जीत हमारी ही होगी। उन्होंने कहा कि दिन-रात इस महामारी से निपटने में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो 7 सूत्र कोरोना वायरस के खिलाफ आज प्रधानमंत्री ने देश की जनता को दिए हैं,हमें उनकी पालना करनी चाहिए, जिनमें अपने घऱ के बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना है। विशेषकर ऐसे व्यक्ति जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो, उनकी हमें ज्यादा देखभाल करनी है और उन्हें कोरोना से बचाकर रखना है।
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लॉकडाउन के दूसरे चरण में भी सैनिकों की तरह काम करेंगे कर्मचारी
हरियाणा के सरकारी, अनुबंध व ठेका कर्मचारी लॉकडाउन के दूसरे चरण में भी कोरोना के खिलाफ सैनिकों की तरह लड़ेंगे। सर्व कर्मचारी संघ ने जनता से यह भी वादा किया है कि स्वास्थ्य विभाग का मेडिकल व पैरा मेडिकल स्टाफ अग्रणी पंक्ति में खड़े होकर कोविड 19 के संक्रमण को रोकने का काम करेगा और अन्य विभागों के कर्मचारी किसी भी कीमत पर आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं होने देंगे। इसके लिए कर्मचारियों को दिन-रात काम करना पड़ा तो वे इससे भी पीछे नहीं हटेंगे।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने इस बात पर अपनी कड़ी नाराजगी भी जाहिर की है कि सीएम ने कोरोना के खिलाफ तन-मन-धन से कोरोना के खिलाफ निडरता से डटे कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन सकसं से अभी तक बातचीत तक करना आवश्यक नहीं समझा है। कर्मचारियों के बारे सारे निर्णय एक तरफा लिए जा रहे हैं। सरकार संघ द्वारा लिखे जा रहे पत्रों का कोई जबाव नहीं दे रही है। बावजूद इसके कर्मचारी युद्ध में सैनिक की तरह कोरोना के खिलाफ जंग लड़ेंगे।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के ठेका कर्मचारियों, आईसीडीएस सुपरवाइजर, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुबंधित वीएलडीए, रोडवेज के ठेका कर्मचारियों, जन स्वास्थ्य विभाग के पंचायती पंप आपरेटर, हुड्डा विभाग के सीवर मैन व अन्य ठेके पर लगे कर्मचारियों के बकाया तीन महीने के बकाया वेतन का भुगतान करने की मांग की है। लांबा ने कहा कि अब कर्मचारियों के पास 21 दिन का अनुभव है, उसका लाभ उठाकर 3 मई तक बढ़ाए गए दूसरे चरण के लॉकडाउन में कर्मचारी और बेहतर तरीके से काम करेंगे।
दूसरे चरण के लॉकडाउन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को अप्रवासी मजदूरों, रोजाना कमा कर खाने वाले मजदूरों ओर जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुंचाना पड़ेगा। अब तक यह काम समाज सेवी संस्थाएं ही कर रही थी, अब उनके संसाधन सिकुड़ते जा रहे हैं और राशन की मांग बढ़ती जा रही है।
अगर सरकार ने इस तरह गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो भूख के कारण हालात बिगड़ते देर नहीं लगेगी , जिससे सबकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। अभी तक सरकार की घोषित योजनाएं धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है। कारखाना मालिकों ने मजदूरों को तालाबंदी का वेतन ही नहीं दिया है और पुन: रोजगार लगने की कोई गारंटी नहीं है।
सरसों व गेहूं खरीद के लिए ही लगेगी कर्मचारियों की ड्यूटी
मुख्यमंत्री मनोहर लाल
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के सरकारी कार्यालयों में कामकाज अभी सुचारु रूप से नहीं हो पाएगा। बंद की अवधि बढ़ने के कारण अगले आदेशों तक वर्तमान व्यवस्था ही लागू रहेगी। सरकार बुधवार से शुरू हो रही सरसों व 20 अप्रैल से चलने वाली गेहूं खरीद के लिए ही पीडब्ल्यूडी, कृषि, राज्य विपणन बोर्ड समेत अन्य विभागों की कर्मचारियों की सेवाएं लेगी ताकि किसान की फसल जल्दी से जल्दी खरीदी जा सके।
चूंकि, मजदूर पर्याप्त मात्रा में न होने पर कर्मचारियों को फसल खरीद में लगाने का फैसला लिया गया है। सूत्रों के अनुसार लगभग 5000 कर्मचारी इस काम लगाए जाएंगे। जरूरी सेवाओं वाले विभागों में रोटेशन आधार पर स्टाफ को बुलाने का क्रम जारी रहेगा। पब्लिक डीलिंग वाले कार्यालयों को खोलने का रिस्क सरकार कत्तई नहीं लेना चाहती। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन अवधि 3 मई तक के दूसरे चरण के मद्देनजर मंडियों में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना सुनिश्चित की जाएगी।
सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने व सीमित संख्या में किसान मंडियों में अपनी उपज लेकर आएं इसलिए सरसों के खरीद केंद्रों की संख्या 67 से बढ़ाकर लगभग 243 व गेहूं के लिए मंडियों और खरीद केंद्र की संख्या 477 से बढ़ाकर लगभग 2000 की गई हैं। 20 अप्रैल के बाद 30 प्रतिशत मानव शक्ति के साथ फैक्टरियों में उत्पादन की अनुमति दी जा सकती है।