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हरियाणा में कोरोना वीर को मिल रही मकान खाली करने की धमकी, सीएम ने दिए कार्रवाई के आदेश

Mon, 13 Apr 2020 11:34 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीएम मनोहर लाल
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हरियाणा के पीजीआईएमएस रोहतक से इलाज करवाने के बाद ठीक होकर घर लौटी महिला मंजू को मकान खाली करने की धमकियां मिल रही हैं। उन्हें आस पड़ोस के लोग परेशान कर रहे हैं। मंजू ने सीएम मनोहर लाल से ऑनलाइन बातचीत करने हुए अपनी परेशानी बताई। सीएम हरियाणा रविवार को कार्यक्रम के तहत कोरोना वीरों से उनके संक्रमित होने से लेकर ठीक होकर घर पहुंचने तक के संघर्ष की दास्तां सुन रहे थे।
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मंजू ने बताया कि उनका 23 मार्च को कोरोना का पॉजिटिव टेस्ट आया था। 10 दिन अस्पताल में रहकर वह ठीक होकर घर लौटी हैं। उन्होंने बताया कि एक बार तो उनके मन में घबराहट पैदा हुई पर डॉक्टरों के व्यवहार से उन्हें हौसला मिला और अब वे इससे उबरकर बाहर आ गई हैं। गांव वाले मकान खाली करने की धमकी दे रहे हैं। उन्हें परेशान किया जा रहा। सीएम ने उन्हें आश्वस्त किया कि धमकी देने वालों पर कार्रवाई होगी।

डीसी को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दे दिए जाएंगे। उन्हें कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने पांच कोरोना वीरों से बात की और उनको इस जीत के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि प्रदेश के लोगों से कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हौसला रखना होगा। सरकार ने इस लड़ाई से लड़ने के लिए सभी प्रकार के आवश्यक प्रबंध किए हैं।
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इनके फलस्वरूप ही कोरोना संक्रमित मरीजों में से लगभग तीन दर्जन अस्पतालों में इलाज करवाकर ठीक होने के बाद अपने घरों को लौट गए हैं। वे इस लड़ाई को जीतने वाले वास्तविक सैनिक हैं। कोरोना की लड़ाई में हमें न डरना है, न हारना है, बल्कि कोरोना को हराना है और जीतना है। इस प्रकार हम कोरोना को हरियाणा से हराएंगे और भारत से भगाएंगे।
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ये भी बोले सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन अवधि के दौरान अपने घरों में एकांतवास में जीवन व्यतीत कर रहे लोगों को इस समय का सदुपयोग करना चाहिए। खुद में नई ऊर्जा का संचार करें। जैसे कि प्राचीन काल में हमारे ऋषि-मुनि एकांतवास में जाकर साधना व तप करते थे और अपने आप में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते थे। इस दौरान शराब छोड़ी व परिवार के किसी सदस्य से छुड़वाई भी जा सकती है।

इन्होंने भी बताए अपने अनुभव
- गुरुग्राम के कपिल चोपड़ा को 22-23 मार्च को बुखार आया था और वे ईलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुए। 2 अप्रैल को उनका निमोनिया का टेस्ट हुआ था और इसके बाद कोविड-19 का टेस्ट किया गया।  इसके साथ ही गुरुग्राम के सेक्टर 10 के सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने भी उनका टेस्ट किया। लगभग ढ़ाई सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद रविवार को सुबह ही वह डिस्चार्ज हुए। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे अपनी सोसाइटी के लोगों व बुजुर्गों के साथ व्हाट्सएप के माध्यम से जुड़े रहे।

- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणी में शामिल मोहित की माता मोनिका ने भी मुख्यमंत्री के साथ अपने विचार सांझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी मनु लंदन में पढ़ती है और इस महामारी की स्थिति  को देखते हुए वह भारत लौट आई थी। 16 मार्च को गुरुग्राम के सेक्टर 10 में उनकी बेटी का कोरोना टेस्ट हुआ था, जो 17 मार्च को पॉजिटिव आया था। इसको देखते हुए परिवार के सभी सदस्यों का कोरोना टेस्ट किया गया, जिसमें 18 मार्च को उनके बेटे मोहित का भी कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया और दोनों को गुरुग्राम के सेक्टर 10 के नागरिक अस्पताल में तीन-चार दिन भर्ती रखा। अस्पताल के डॉक्टर, नर्सों व पैरा-मेडिकल स्टॉफ का व्यवहार बहुत ही अच्छा था। बाद में फोर्टिस अस्पताल में दोनों को दाखिल करवाया गया तथा 29 मार्च को दोनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 14 दिन अस्पताल में रहने के बाद 14 दिन घर में क्वारन्टीन में रहने के बाद उनका 28 दिन का समय पूरा हो गया है।

- फरीदाबाद के अमृत पाल सिंह और गुरुग्राम के मनु वैश्य सफदरगंज अस्पताल, दिल्ली से ठीक होकर लौटे हैं। उन्होंने से सीएम से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि जो लोग कोरोना की लड़ाई से लडक़र आएं हैं, उनके प्रति सहानुभूति जतानी होगी।
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