आपको यह जानकर थोड़ी हैरानी जरूर होगी कि यूटी प्रशासन सिटको का कर्जदार हो गया है। चार महीने से यूटी के सरकारी वाहनों में भराए जाने वाले पेट्रोल और डीजल का 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। इधर कोरोना के कारण मंदी के इस दौर में सिटको के सामने वित्तीय संकट खड़ा हुआ है।
जिस कारण से सिटको के 1200 कर्मचारियों को अभी तक सैलरी का भुगतान नहीं किया जा सका है। सिटको के पेट्रोल पंपों से यूटी के सैकड़ों सरकारी वाहनों में प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल भरवाया जाता है। सिटको प्रबंधन की लापरवाही के कारण चार महीने के पेट्रोल-डीजल के भुगतान के लिए बिलों को भेजने में लापरवाही बरती गई। इसके कारण अभी तक इन बिलों का 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया जा सका है।
सिटको कर्मचारी वर्कर्स यूनियन के प्रधान बलदेव राज ने बताया कि प्रबंधन द्वारा यदि बिलों के भुगतान को लेकर लापरवाही नहीं बरती गई होती तो यूटी द्वारा बकाया बिलों का भुगतान हो गया था, जिससे सिटको में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन का भुगतान आसानी से किया जा सकता था। उन्होंने जल्द ही यूटी प्रशासन द्वारा पेट्रोल-डीजल के भुगतान किए जाने की मांग की।