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Corona Commando: कोरोना पर है भारी चार दोस्तों की यारी...मिलकर ठाना महामारी को हराना

Fri, 08 May 2020 11:17 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो वीणा तिवारी, चंडीगढ़
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कोरोना कमांडो चार दोस्त - फोटो : अमर उजाला
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हम चारों 12 साल से एक साथ हैं। हर सुख, दु:ख को साथ मिलकर बांटते हैं। अब कोरोना से जंग को भी तो हमें साथ ही जीतना है। साथ जीयेंगे, साथ मरेंगे, कोरोना से नहीं डरेंगे। यह कहना है पीजीआई के नर्सिंग ऑफिसर्स हितेश कुमार, चंद्रपाल, दीपक और नरेंद्र त्यागी का, जो एक साथ पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में ड्यूटी करने के बाद एक साथ ही क्वारंटीन हुए हैं।
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इन चारों की दोस्ती की चर्चा पीजीआई में आम है। इनमें से एक अगर कहीं दिखाई दे तो बाकी तीन का वहां चंद मिनट ने पहुंचना तय है। कोरोना महामारी के इस दौर में भी ये चारों एक दूसरे से अलग नहीं हुए। पीजीआई प्रशासन को भी इन पर गर्व है। क्योंकि ये चारों दोस्त पीजीआई के वो जाबाज हैं जो संकट की घड़ी में आगे बढ़कर मोर्चा लेते हैं।

पीजीआई प्रशासन से अनुरोध कर लगवाई ड्यूटी
इन चारों में से नरेंद्र को छोड़कर बाकी तीनों राजस्थान से हैं। नरेंद्र आगरा के हैं। जब देश में कोरोना का आतंक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था तब ये चारों पीजीआई के अलग-अलग यूनिट में ड्यूटी कर रहे थे। हितेश ने बताया कि शहर में कोरोना के मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन में अलग से कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाया गया। उस समय हम चारों अलग-अलग इमरजेंसी यूनिट में तैनात थे।
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कोरोना हॉस्पिटल में ड्यूटी के नाम पर स्टाफ में डर का माहौल था। कई लोग लिस्ट से अपना नाम हटवाने की जुगाड़ में लगे थे। ऐसे में हम चारों ने निर्णय लिया कि एक साथ कोरोना के खिलाफ जंग में कूदेंगे। इसके लिए हमने पीजीआई प्रशासन से अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर हम चारों की ड्यूटी कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में लगाई गई। हमने एक साथ ड्यूटी शुरू की और उसे पूरा किया। अब क्वारंटीन का समय पूरा करने के बाद अगर फिर हमारी ड्यूटी लगाई गई तो हम फिर साथ साथ अपना फर्ज निभाएंगे।
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घूमना-फिरना और नौकरी सब एक साथ

चारों ने 2008 में पीजीआई में नर्सिंग की नौकरी शुरू की थी। दीपक ने बताया कि उस समय हम एक साथ एक ही घर में रहते थे। धीरे-धीरे परिवार बढ़ता गया और अगल-अलग घर मे शिफ्ट होना पड़ा। चारों नयागांव में अलग-अलग मकान में रहते हैं लेकिन आज भी कहीं घूमने जाना हो या स्पेशल ड्यूटी करनी हो तो हम चारों एक साथ रहते हैं।

वहीं नरेंद्र का कहना है कि कोरोना से ये जंग आसान नहीं। लेकिन यारों के साथ हर मुश्किल आसान हो जाती है। कोविड प्राइवेट रूम में ड्यूटी के दौरान पीपीई किट पहनकर काम करना बेहद कठिन होता है। लेकिन यकीन मानिए हम चारों ने एक दूसरे को देखकर उसे भी आसान बना दिया।

हम चार हैं एक साथ तो आप सब क्यों नहीं
इन चार दोस्तों का कहना है कि अगर वो इस संकट की घड़ी में एक साथ मिलकर कोरोना से मोर्चा ले सकते हैं तो बाकी लोग क्यों नहीं। इस समय देश का हर नागरिक एक दूसरे से परिवार को तरह जुड़ा है। क्योंकि देश के हर कोने में रहने वाला भारतीय इस महामारी का दंश झेल रहा है। इस समय एक जुट होकर बेहद समझदारी से काम करने की जरूरत है। देश को कोरोना से बचाना है तो मिलकर हाथ बढ़ाना होगा।
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