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कोरोना वायरसः लॉकडाउन के फैसले पर कारोबारी पीएम मोदी के साथ, लेकिन पक्के खर्चों से परेशान

Thu, 26 Mar 2020 02:43 PM IST
खुशबू गोयल वरिन्दर राणा, लुधियाना
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Narendra Modi - फोटो : ANI
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 दिन के लॉकडाउन के फैसले से पंजाब के लुधियाना जिले के कारोबारी सहमत हैं। पंजाब सरकार की तरफ से कर्फ्यू लगाने के बाद सभी यूनिट लगभग बंद पड़े हैं। कारोबारी खुद मानते हैं कि इस बीमारी से बचने के लिए कोई दवा अब तक नहीं बनी है। ऐसे में लॉकडाउन जैसा फैसला अति जरूरी था। अब कारोबारियों के लिए चिंता का एक ही विषय है कि फैक्टरी बंद होने के बाद उन्हें हर माह पक्के खर्च को वहन करने ही पड़ेंगे।
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ऐसे में उनकी सरकार से यही उम्मीद है कि सरकार उन्हें बिजली, मुलाजिमों के वेतन और बैंकों के ब्याज से कुछ राहत जारी करें। कोरोना संक्रमण को देखते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को करदाताओं और कारोबारियों को कुछ राहत देने की घोषणाएं की हैं। इसमें पांच करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनियों के देरी से जीएसटी फाइलिंग पर ब्याज, जुर्माना और विलंब शुल्क नहीं लेने का फैसला लिया गया है। 

कारोबारी केंद्र सरकार के इस फैसले पर अभी खुश नहीं है। उनका मानना है कि इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है। पैसा तो उन्हें देना ही पड़ेगा चाहे देरी से देना पड़े। ऐसे में कारोबारियों की एक ही मांग है कि सरकार इंडस्ट्री बंद होने के कारण पड़े रहे पक्के खर्चों पर कुछ राहत दें तभी उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। अभी लॉकडाउन कितना समय चलेगा। इस पर भी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जितने भी एलान मंगलवार को किए हैं वो सिर्फ एक फॉरमैलिटी की तरह है। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि 25 दिन अगर किसी कारोबारी की फैक्टरी बंद रहती है तो उसे पड़ने वाले पक्के खर्चों पर क्या राहत सरकार देती है। मैं खुद अपनी फैक्टरी की बात करूं, तो मुझे हर माह 50 हजार रुपये बिजली बिल (चाहे फैक्टरी बंद रहे), लगभग 2.50 लाख रुपये मुलाजिमों का वेतन और इसके अलावा बैंक में बनी लिमिट पर ब्याज अलग से पड़ेगा। सरकार को चाहिए हमें इस पक्के खर्च पर कुछ राहत दें।
- बदीश जिंदल, प्रधान फोपसिया

लॉकडाउन के कारण से सबसे ज्यादा नुकसान इस समय हौजरी को उठाना पड़ रहा है। विंटर सीजन के उनके पास एडवांस में ऑर्डर थे अब काम नहीं हो रहा है। वहीं विदेशों में भेजने जाने वाले ऑर्डर भी ठप हो गए हैं। इस समय हौजरी यूनिट बंद पड़े हैं ऐसे में हमें पक्के खर्च पड़ रहे हैं। मुलाजिमों को चाहे घर भेज दिया है लेकिन उनका वेतन तो देना ही पड़ेगा। इसके अलावा बिजली और बैंक ब्याज को देना होगा। दूसरी बात इस समय पेमेंट कहीं से आ नहीं रही है। सरकार को इस समय फिक्स खर्चों में राहत देनी चाहिए।
- हरीश केयर, वित्त सचिव निटवियर क्लब

यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन (यूसीपीएमए) में लगभग 4500 छोटे यूनिट हैं। कोरोना को लेकर हम सरकार के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। जीएसटी और आयकर रिटर्न फाइल में समय सीमा बढ़ाने का फैसला सरकार ने दिया है। अब बंद पड़े यूनिट को लेकर आने वाले पक्के खर्च को लेकर सरकार को लिखा गया है। वह इसमें कुछ रियायत जरूर करें। अब इंडस्ट्री बिजली का इस्तेमाल नहीं कर रही है तो कम से कम बिजली बिल तो माफ होने चाहिए। इस मामले को लेकर पीएम और एफएम को पत्र भेजा गया है।
- जीएस चावला, प्रधान यूसीपीएमए
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